*हम राधा और श्री कृष्ण के सम्बन्ध को एक कल्पना क्यो मानते है?*

*हम राधा और श्री कृष्ण के सम्बन्ध को एक कल्पना क्यो मानते है?*

_श्रीकृष्ण अपने समय में महान आदर्श चरित्र वाले माने जाते थे._ महाभारत के सभी प्रमुख पात्र भीष्म, द्रोण, व्यास, कर्ण, अर्जुन, युधिष्ठिर आदि श्रीकृष्ण के महान-चरित्र की प्रशंसा करते थे. उस काल में भी परस्त्री से अवैध संबंध रखना दुराचार माना जाता था, तभी तो भीम ने द्रौपदी की ओर उठने वाली कीचक की कामी (कामुक) आंखें निकाल लीं थीं. *यदि श्रीकृष्ण का भी राधा नामक किसी औरत से दुराचार हुआ होता तो श्रीकृष्ण पर मिथ्या दोषारोपण करने वाला शिशुपाल उसे कहने से न चूकता.* _सम्पूर्ण महाभारत में केवल कर्ण का पालन करने वाली माँ राधा को छोड़कर इस काल्पनिक राधा का कही नाम नहीं है._

भागवत् पुराण में श्रीकृष्ण की बहुत सी झूठी लीलाओं का वर्णन है, पर यह राधा वहाँ भी नहीं है. *राधा का वर्णन मुख्य रूप से ब्रह्मवैवर्त पुराण में आया है. यह पुराण वास्तव में कामशास्त्र है,* जिसमें श्रीकृष्ण राधा आदि की आड़ में लेखक ने अपनी काम पिपासा को शांत किया है, पर यहाँ भी मुख्य बात यह है कि इस एक ही ग्रंथ में श्रीकृष्ण के राधा के साथ भिन्न-भिन्न सम्बन्ध दर्शाये हैं, जो स्वतः ही राधा को काल्पनिक सिद्ध करते हैं. देखिये-

1.ब्रह्मवैवर्त पुराण ब्रह्मखंड के पाँचवें अध्याय में श्लोक 25,26 के अनुसार *राधा को कृष्ण की पुत्री* सिद्ध किया है. क्योंकि वह श्रीकृष्ण के वामपार्श्व से उत्पन्न हुई बताया है.

2. ब्रह्मवैवर्त पुराण प्रकृति खण्ड अध्याय 48 के अनुसार *राधा कृष्ण की पत्नी (विवाहिता)* थी, जिनका विवाह ब्रह्मा ने करवाया.

3. इसी पुराण के प्रकृति खण्ड अध्याय 49 श्लोक 35,36,37,40, 47 के अनुसार *राधाश्रीकृष्ण की मामी थी.* क्योंकि उसका विवाह कृष्ण की माता यशोदा के भाई रायण के साथ हुआ था. गोलोक में रायण श्रीकृष्ण का अंशभूत गोप था. अतः गोलोक के रिश्ते से *राधा श्रीकृष्ण की पुत्रवधु हुई.*

क्या ऐसे *विरोधाभासी ग्रंथ* और ऐसे व्यक्ति को प्रमाण माना जा सकता है? हिन्दी के कवियों ने भी इन्हीं पुराणों को आधार बनाकर भक्ति के नाम पर शृंगारिक रचनाएँ लिखी हैं. ये *लोग महाभारत के कृष्ण तक पहुँच ही नहीं पाए. जो पराई स्त्री से तो दूर, अपनी एक मात्र स्त्री रूकमणी से भी बारह साल की तपस्या के बाद केवल संतान प्राप्ति हेतु समागम करता है, जिसके हाथ में मुरली नहीं, अपितु दुष्टों का विनाश करने के लिए सुदर्शन चक्र था, जिसे गीता में योगेश्वर कहा गया है.* जिसे दुर्योधन ने भी पूज्यतमों लोके (संसार में सबसे अधिक पूज्य) कहा है, जो आधा पहर रात्रि शेष रहने पर उठकर ईश्वर की उपासना करता था, युद्ध और यात्रा में भी जो निश्चित रूप से संध्या करता था. जिसके गुण, कर्म, स्वभाव और चरित्र को *ऋषि दयानन्द ने आप्तपुरुषों के सदृश बताया, बंकिम बाबू ने जिसे सर्वगुणान्ति और सर्वपापरहित आदर्श चरित्र लिखा।*

आज तक आप अज्ञान मे श्री कृष्ण का अपमान करते रहे होगे किन्तु देर आए दुरूस्त आए अब तो सम्भल जाए!!

_*अभी अगर आप राधा कृष्ण करेगे तो क्या यह माता रूकमणी के साथ अन्याय नही होगा??*_
जिसके दोषी आप होगे!!

*आर्य समाज दे रहा आवाज,*
*जागो हिन्दूओ आज के आज।*

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धन्यवाद

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