साहब जरा ध्यान दीजिए हमभी अपने बच्चों को आई ए एस पी सी एस बनाना चाहते हैं।

गंगाघाट में सट्टा जुआ व गांजा माफियाओं के कारण मासूम बच्चों का भविष्य अंधकार में जिम्मेदार मौन

डिजिटल प्लेटफॉर्म से लगाया जा रहा है नगर में बड़े पैमाने पर सट्टा प्रशासन मौन

फोन के जरिए लगाया जा रहा बड़े पैमाने पर सट्टा

गंगाघाट में क्राइम बढ़ने का कारण सट्टा माफिया किसी दिन हो सकती बड़ी दुर्घटना प्रशासन मौन

नगर केकई गली मोहल्लों में चल रहा डिजिटल सट्टा प्रशासन मौन

दैनिक समाज जागरण ब्यूरो उन्नाव उमेश शुक्ला

गंगाघाट उन्नाव नगर के कई गली मोहल्लों में पड़ने लिखने वाले छोटे छोटे मासूम बच्चों के हाथ में इन दिनों कागज कलम देखने को मिल रहा है लेकिन ये कागज कलम भविष्य को बनाने के लिए नहीं बल्कि मासूमों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ करने के लिए दिख रहा है आपको बता दें कि उन्नाव के गंगाघाट में बेखौफ सटोरियों ने इस कदर आतंक फैला रखा है डिजिटल तरीके से डेली लाखों पढ़ने लिखने वाले बच्चों को कागज कलम देकर हर गली मोहल्ले में सट्टा लिखवाया जा रहा है और उनसे मोटी कमाई कर रहे हैं। (आइपीएल) शुरू होते ही सट्टेबाज सक्रिय हो गए हैं, लेकिन प्रशासन है कि मौन बैठा हुआ है आये दिन किये जा रहे गुडवर्क के बावजूद सट्टा माफियाओं पर प्रशासन का हाथ क्यो नहीं पहुंच पा रहा है शायद यह बताने की जरूरत नहीं पड़ेगी दरअसल आपको बता दें कि इस डिजिटल खेल में कुछ सफेदपोश नेताओं के साथ बड़े-बड़े व्यापारी व तथाकथित पत्रकार भी संलिप्त रहते हैं,जिसके कारण प्रशासन को मजबूरन न चाहते हुए भी अपने आपको गांधी जी के कथन पर चलना पड़ता है। और खाना पूर्ति के लिए छोटे-मोटे एजेंटों को पकड़कर अपनी पीठ थपथपा लेती है। स्थानीय गतिविधियों के अनुसार नगर की कई गलियों में डिजिटल तरीके से सट्टा लगाया जा रहा है। करीब दो माह तक चलने वाले आइपीएल के दौरान एक बुकी कमीशन के तौर पर लाखों रुपये कमाकर मासूम बच्चों को कंगाली की तरफ मोड़ देता है। जिसके कारण मासूम बच्चे अपराध करने में मजबूर हो जाते हैं हालात यह है कि पुलिस व्यवस्थाओं को धता बताते हुए सटोरिए प्रतिदिन लाखों रुपये का दाव क्रिकेट सट्टे पर लगा रहे हैं। मैच की प्रत्येक गेंद लाखों रुपये इधर-उधर करती हुई निकल जा रही है। स्थानीय गतिविधियों के अनुसार नगर में बालू घाट ,प्रेम नगर,मिश्रा कालोनी,गांधी नगर,कंचन नगर,नेहरू नगर चंपा पुरवा,गंगा नगर,समेत कई अलग-अलग जगहों पर बड़े पैमाने पर डिजिटल सट्टा लगाया जा रहा है। डिजिटल सटोरिया मोबाइल फोन के द्वारा युवा पीढ़ी को बर्बाद कर रहे हैं। जिनपर मैच के दौरान करोड़ों रुपयों का दाव खेला जाता है। नगर के सट्टा माफियाओं का सीधा संपर्क दूसरे जिलो से नेटवर्क जुड़ता है। दरअसल, इस काले डिजिटल खेल में सफेदपोश नेताओ से लेकर बड़े-बड़े व्यापारी संलिप्त रहते हैं, जिन तक प्रशासन चाह कर भी नहीं पहुंच पाती है। इस मामले में प्रशासन को अभी तक कोई भी सफलता नहीं मिली है। सूत्रों की मानें तो प्रशासन महकमा इस बात से वाकिफ है लेकिन कही न कही मोटी रकम के आगे आँख में पट्टी और कान में तेल डालकर जिम्मेदार अधिकारियों को बर्गलाने का कार्य कर रही है।

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मासूमो पर असर
सट्टा खेलने के बाद जब मासूम बच्चे हार जाते हैं तो वो अपराध की दुनिया में अपना पैर पसार लेते हैं कई मासुमों ने सट्टा हारने के बाद कई ऐसे बड़े कांड कर दिया कि पैरो के नीचे से जमीन खिसक जायेगी हत्या लूट व चैन स्नैचिंग जैसे काले कारनामे करने लगते है।

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गंगाघाट में अपराध बढ़ने का कारण
गंगाघाट उन्नाव और कानपुर का बॉर्डर है कानपुर के टॉपटेन के अपराधी जब कोई बड़ा कांड करते हैं तो वह गंगाघाट में अपना आशियाना बना लेते हैं जिसके कारण प्रशासन चिन्हित नहीं कर पाता है और अपराधी को उन्नाव के अपराधियों का संरक्षण मिल जाता है जिसके कारण वो गंगाघाट में अपना काला साम्राज्य स्थापित कर मासुमों की ज़िंदगी के साथ खिलवाड़ करना चालू कर देते हैं जिसके कारण गंगाघाट में अपराध कम नहीं हो पाता वही बात करे मुखबिर की तो उनका क्या कहना बड़े मिया तो बड़े मिया छोटे मिया तो सुभानअल्लाह प्रशासन के साथ मिल अपने फायदे के लिए कई ऐसे बेकसूरों को पकड़वा देते हैं जिनका अपराध व अपराधियों से दूर दूर तक का कोई वास्ता ही नहीं होता है।

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दांव लगाने की डिजिटल तरीके

कौन टास जीतेगा और बल्लेबाजी या गेंदबाजी करेगा, इस पर भाव लगता है। इसके बाद पहली टीम 20 ओवर में कितना रन बनाएगी, कौन खिलाड़ी कितना रन और विकेट लेगा, इस पर भी दाव लगाया जाता है। किस ओवर में कितने चौके और छक्के लगेंगे, इसके लिए दाव पर रुपये लगाए जाते हैं। सूत्रों के अनुसार सट्टा बाज के बड़े खिलाड़ी नगर के कई क्षेत्रों में हैं, इधर-उधर क्षेत्रों से इसे संचालित कर रहे हैं। यह खेल पूरी तरह से डिजिटल है।

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