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CBI कितना महत्वपूर्ण है ?

एक फाइव स्टार हॉस्पिटल में डॉक्टरों की टीम ने पेशेंट को तुरंत बायपास सर्जरी करवा लेने की सलाह दी।
पेशेंट बहुत नर्वस हो गया किंतु तुरंत तैयारी में लग गया।
ऐसे वक्त थोडा संयम रखकर सैकंड ओपीनियन लेना ज्यादा ठीक होता।
ऑपरेशन के पहले वाले सारे टेस्ट हो जाने के बाद डॉक्टर की टीम ने बजट बताया 18 लाख ₹, जो कि पेशंट और परिवार वालों को बहुत ही ज्यादा लगा।
परंतु जान है तो जहान है’ यह सोचकर वह फॉर्म भरने लगा।
फार्म भरते भरते व्यवसाय का कॉलम आया।
ऑपरेशन की टेंशन और रकम की व्यवस्था की उधेड़बुन में ना जाने क्या सोचते-सोचते, या पता नहीं किस जल्दबाजी में उसने उस काॅलम के आगे ‘C.B.I.’ लिख दिया।
और फिर अचानक हॉस्पिटल का वातावरण ही बदल गया।
डॉक्टरों की दुसरी टीम चेकअप करने आयी।
रीचेकिंग हुई।
टेस्ट दोबारा करवाए गए और टीम ने घोषित किया कि ऑपरेशन की जरूरत नहीं है।
मात्र नियमित दवाइयां लेते रहिये, ब्लाकेज निकल जायेगा।
पेशेंट को रवाना करने से पहले 3 महीने की दवाइयाँ फ्री दी गई और चेकअप और टेस्ट फीस में भी जबरदस्त ‘डिस्काउँट’ दिया गया।
इस बात को छः महीने हो गये।
पेशंट अब भला चंगा है।
कभी कभी उस हाॅस्पीटल में चेकअप के लिये चला जाता है।
उस दिन के बाद उसका चैकअप भी फ्री होता है और बिना चाय पिलाये तो डाॅक्टर आने ही नहीं देते।
पेशेंट बहुत खुश है हाॅस्पीटल के इस प्रेम युक्त व्यवहार से।
गाहे बगाहे लोगो के आगे इस अस्पताल की तारीफ करता रहता है।
पर कई बार ये सोच कर बहुत हैरान होता है कि, 15 साल हो गये उसे नौकरी करते, पर ‘Central Bank of India’ का कर्मचारी होने की वजह इतनी इज्जत कभी नही मिली।
इतना सम्मान तो उसके परिवार वालों ने कभी नहीं दिया, जैसे वो अस्पताल वाले उसे सर पर बैठाए रखते हैं।

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