झूठा है तेरा वादा : 2022 तक सभी को घर: तीन लाख घर खरीदार परेशान क्यों है ?

समाज जागरण/रमन झा

वादा तेरा वादा, वादे पे तेरे मारा गया, बंदा मै सीधा-सादा, वादा तेरा वादा। कितना सटीक है यह गाने का मुखरा है। 1972 में दुश्मन फिल्म की यह गाना जितना उस समय में सटीक था उतना ही आज भी है। गायक किशोर कुमार के स्वर में लक्ष्मीकांत प्यारे लाल नें लयबद्ध किया है और आनन्द बख्शी नें इस गीत को अपने कलम से जान बख्शी है।
गाने की शुरुआत में कुछ पंक्ति है जो इस प्रकार है: हाँ …, सच्चाई छुप नहीं सकती, बनावट के उसूलों से, कि खुशबू आ नहीं सकती, कभी कागज़ के फूलों से ! मैं इन्तज़ार करूँ, ये दिल निसार करूँ मैं तुझसे प्यार करूँ, ओ मगर कैसे ऐतबार करूँ ? झूठा है तेरा वादा !

आईये जानते है इस गाने का इस समय मे क्या महत्व है। आज हर तरफ राजनीतिक में फ्रि-फ्रि का मामला चल रहा है। कोई किसी को बिजली फ्रि दे रहा है तो कोई किसी को पानी फ्रि दे रहा है। कोई किसी को जमीन फ्रि देने का वादा कर रहा है तो कोई किसी को घर देने का वादा। जीवन भर मुफ्त राशन देने का वादा कर रहा है तो कोई हनीमुन पर फ्रि में भेजने का। लगता है राजनीतिक पार्टी नही कोई बाटा के शो रूम हो। एक बात और समझने वाली है कि आपके वोट की कीमत क्या है सिर्फ वादा और दावा या फिर 500 रुपये और मुर्गा। आपके वोट को पाकर नेता जी रातों रात करोड़पति बन जाते है। विश्वास नही तो एडीआर की रिपोर्ट देख लिजिए।

मोदी जी और प्रदेश के योगी जी क्या इनको घर नही मिलना चाहिए।

आईये एक नजर डालते है उत्तर प्रदेश के आर्थिक राजधानी और दिल्ली एनसीआर के उन घर खरीदारों पर जिनको मेहनत के कमाई देने के बाद भी 10-10 सालों से घर के लिए मारे-मारे भटकना पड़ रहा है। देश के प्रधानमंत्री नें देश से वादा किया कि 2022 तक सबके ऊपर अपना छत होगा। तो क्या नोएडा ग्रेटर नोएडा के घर खरीदार इस श्रेणी मे नही आते है। या उनका सिर्फ इतना गुनाह है कि उन्होने दिल्ली एनसीआर में अपना एक घर हो का सपना देखा और बिल्डर को अपने सारे जीवन भर के कमाई दे दिया। अब अपने ही पैसे लुटाने के बाद उनकों धरना प्रदर्शन और भूख-हड़ताल करने पड़ रहे है। मोदी जी और प्रदेश के योगी जी क्या इनको घर नही मिलना चाहिए।

हाल ही में आये सीएजी रिपोर्ट में 54 हजार करोड़ की घोटाले का मामला सामने आया है। यह मामला 2011 में प्रदेश के उच्च न्यायालय के संज्ञान में आया और माननीय न्यायालय ने मुख्य सचिवस्तर के अधिकारी से मामले की जांच कराने की जिम्मेदारी उस समय के प्रदेश सरकार को सौपी। लेकिन राजनीतिक में गठबंधन से ज्यादा ठगबंधन हावी है। पूरे 5 साल की समाजवादी सरकार जांच को होने नही दिया या जानबुझकर नही करवाया। 2012 में जांच करने आये अधिकारी ने कहा था कि नोएडा ग्रेटर नोएडा में बड़े पैमाने पर औद्योगिक भूमि को आवासीय बनाकर औने-पौने भाव में बेच दिया गया है। अधिकारियो नें मास्टर प्लान और ग्रीन एरिया का भी ध्यान नही रखा है। लेकिन आज तक किसी बड़े अधिकारी को किसी प्रकार के न्यायिक दंड का सामना नही करना पड़ा है।

राजनीतिक मे सिर्फ जनता को ही लूटा जाता रहा है। नोएडा ग्रेटर नोएडा में व्याप्त भ्रष्ट्राचार से यह बात साफ हो जाते है। 3 लाख घर खरीदारों के घर खरीदने के सपने और उनके साथ हो रहे खिलवाड़। रिवाईज्ड मास्टर प्लान 2021 में 20-25 प्रतिशत घर कमजोर और गरीब वर्गों के लिए बनाने के प्रावधानों का खुला उलंघन। एनसीआर प्लानिंग कमीशन के द्वारा निगरानी नही होना। 2011 की जांच को 2021 में आडिट रिपोर्ट में सामने आना। यह सब क्या है। कुछ लोगो का मानना है कि सीएजी कि रिपोर्ट भी उस समय में पेश किया गया है जब चुनाव सिर पर है और योगी सरकार को लगता है कि विपक्ष ज्यादा मजबूत होते जा रहे है।

नोएडा शहर के वरिष्ठ नागरिक व अधिवक्ता अनिल के गर्ग (मौलिक भारत) लगातार इस मामले को लेकर सवाल उठाते रहे है लेकिन जब राजनीतिक गठबंधन भ्रष्ट्राचार की ठगबंधन में बंध जाए तो कुछ ऐसे ही होते है। बीएसपी सरकार में हुए भूमि-घोटाले की जांच बीजेपी सरकार के कार्यकाल के आखिरी माह में आना यह साबित करने के लिए काफी है। माना कि प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी अपने साफ-सुथरे छवि के साथ कार्य कर रहे है लेकिन बीजेपी पर कोई दाग नही है ऐसा तो नही है। फिर उन नेताओं का भी तो ख्याल रखना है जो पहले बीएसपी मे थे, फिर एसपी और अब बीजेपी में। राजनीतिक मेे पार्टी चलाने के लिए चंदे की जरूरत सबसे ज्यादा है और यह चंदा आम आदमी का तो नही है। ये जरूर है कि जो चंदा पार्टी के पास में होते है उसमें ज्यादातर पैसे आम-आदमी के खुन पसीने की कमाई होते है।

नोएडा ग्रेटर नोएडा मे व्याप्त भ्रष्टाचार में किसी राजनीतिक पार्टी के हाथ नही होने का सबूत आज तक नही मिला है। हाँ यह भी नही कहा जा सकता है कि सबूत है। लेकिन यह तो कहा ही जा सकता है कि क्या 54 हजार करोड़ के भूमि-घोटाला और इतने बड़े गड़बड़ी में कोई राजनीतिक दल पार्टी या नेता शामिल नही है ? पिछले दिनों मौलिक भारत के द्वारा आयोजित मौलिक जन संवाद में भी यह मामला उठा और घर खरीदारों को न्याय दिलवाने के लिए एक साथ एक मंच पर आने का निर्णय लिया गया। लेकिन गली-गली और घर में फैले राजनीतिक महत्वाकांक्षा नें एक मंच पर आने से रोक दिया। क्योंकि हम सभी जानते है कि रेजिडेंस वेलफेयर एसोसिएशन से लेकर घर खरीदार वेफेयर एसोसिएशन तक में राजनीतिक महत्वाकांक्षा अतिक्रमण किया हुआ है।

अब जबकि राजनीतिक मौसम है और वादे और दावे किए जा रहे है। इसी बीच में मौलिक भारत और नोएडा शहर के वरिष्ठ नागरिक अनिल के गर्ग नें सरकार के सामने कुछ समाधान रखे है। क्योंकि फ्रि का वादा करना तब तक सही नही होगा जब तक कि जिसनें पैसे दिए हुए है उनका घर न मिल जाए। सरकार को पहले इन टैक्सपेयरों की दर्द सुनना चाहिए जिनके खुन पसीने की कमाई से बिल्डर ऐशो-आराम कर रहे है और यह बेचारे घर खरीदार सड़क पर धरना दे रहे है। दिल्ली एनसीआर प्लानिंग बोर्ड ने सिर्फ एक डमी की तरफ अपना भूमिका निभाया है, या कहे सिर्फ एक डाकिया बनकर। सरकार को 3 लाख घर खरीदारों के साथ-साथ 20-25 प्रतिशत गरीबों के लिए मकान बनाये चाहिए जिसका उल्लेख 2012 में रिवाइज्ड मास्टर प्लान किया गया था। अब इनके लिए भूमि को आवंटित कर NBCC, HUDCO, AWHO, AFNHB, Hindustan Prefab Limited और अन्य जैसे PSU को बल्क EWS और LIG के निर्माण के लिए बड़ी भूमि आवंटित करनी चाहिए। निजी बिल्डर्स सक्षम नहीं हैं और उसी कमजोर वर्ग के आवासों का निर्माण नहीं करेंगे क्योंकि वे अधिक लाभ के लिए अभ्यस्त हैं। बल्क ईडब्ल्यूएस और एलआईजी के निर्माण के बाद, अधिकारियों को इन आवासों को मेगा स्कीम पर रियायती दरों पर आवंटित करना चाहिए। लॉटरी सिस्टम के रूप में कंप्यूटर आवंटन के माध्यम से ड्रा करें।

खैर राजनीतिक पार्टियों से अब आप भी पूछ सकते है : क्या हुआ तेरा वादा वो कसम वो इरादा। क्या हुआ तेरा वादा वो कसम वो इरादा भूलेगा दिल जिस दिन तुम्हें
वो दिन ज़िन्दगी का आखिरी दिन होगा।। सावधान यह लेख किसी राजनीतिक दल से प्रेरित नही है बल्कि घर खरीदारों की सच है।
मैं इन्तज़ार करूँ, ये दिल निसार करूँ मैं तुझसे प्यार करूँ, ओ मगर कैसे ऐतबार करूँ ? झूठा है तेरा वादा !

सरकार द्वारा मार्च 2022 तक 2 करोड़ घर बनाने का लक्ष्य रखा गया था। सरकार द्वारा इस योजना में बड़े तेजी से काम किया गया है। इस योजना के तहत अब तक लाखो लोगो को घर मिल चुके है। इस योजना में सरकार द्वारा नारा दिया गया है “2022 तक सभी के लिए घर”। सभी को घर मिला क्या ?

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