होली का त्योहार परस्पर भाई-चारे व सौहार्द का प्रतीक : अनिता रोहिल्ला



विश्व रोहिला राजपूत संघ के स्थापना दिवस को लेकर वर्चुअल मीटिंग में सदस्यों ने रखे अपने विचार

समाज उत्थान के लिए बेहतर कार्य करते हुए समाज को एकजुट करना संघ का उद्देश्य

राजेश सलूजा, हिसार। विश्व रोहिला राजपूत संघ की जूम ऐप पर राष्ट्रीय अध्यक्षा श्रीमती अनीता रोहिला राजपूत की अध्यक्षता में एक वर्चुअल मीटिंग हुई। जिसमें 18 मार्च को विश्व रोहिल्ला राजपूत संघ के स्थापना दिवस एवं होली पर्व को सुरक्षित एवं स्वच्छता के साथ में कैसी मनाई जाए। सभी सदस्यों ने अपने-अपने विचार रखें। कृष्णा ईश्वर चैरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन एवं संघ के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रणवीर सिंह रोहिला ने होली पर्व को फूल होली के रूप में मनाने की बात कही और पानी की बचत करने के लिए पानी को व्यर्थ न करने के विषय पर अपनी बात रखते हुए कहा कि जल है तो कल है। आने वाली पीढियों के लिए जल संरक्षण बहुत जरूरी है, क्योंकि हर क्षेत्र में भूमि का जल स्तर लगातार नीचे जा रहा है। राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य राजेश रोहिला आर्य ने होली पर्व की महत्वता बताई। राष्ट्रीय सलाहकार नसीब सिंह रोहिल्ला ने कहा कि वर्ष में यह पर्व एक बार आता है, इसलिए इसको हर प्रकार से बनाए, जिस प्रकार से मनाते आए हैं। वर्चुअल मीटिंग में राष्ट्रीय महासचिव बलबीर सिंह रोहिल्ला, राष्ट्रीय संगठन मंत्री महिपाल रोहिल्ला, राष्ट्रीय सलाहकार अरविंद रोहिला, राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य विपिन रोहिला, प्रदेश अध्यक्ष हरियाणा महिला अनीता रानी, मुकेश रोहिला पालम, कुलदीप रोहिल्ला बावाना, कृष्णा ईश्वर चैरिटेबल ट्रस्ट के धनमंत्री दीपक वर्मा सोनीपत, गुरदास रोहिल्ला कैराना एवं रविंद्र रोहिल्ला राजपूत आदि शामिल है। वर्चुअल मीटिंग में वक्ताओं ने कहा कि हमारा प्रयास उन्नति और विकास के पथ पर चलते हुए समाज उत्थान के लिए बेहतर कार्य करने के साथ-साथ समाज के लोगों को एकजुट करना है, ताकि समाज के फैली कुरुतियों को दूर किया सके। विश्व रोहिला राजपूत संघ के स्थापना दिवस को लेकर वक्ताओं ने कहा कि 18 मार्च को होली है, इसलिए उसी दिन सभी एक स्थान पर एकत्रित नहीं हो सकते, अपने-अपने क्षेत्र में इक्ट्‌ठे होकर स्थापना दिवस को बड़े धूमधाम के साथ मनाए। होली पर्व को लेकर पदाधिकारियों ने कहा कि होली जलाना कुरीतियों व बुराइयों को जलाने से संबंधित है। यह त्योहार परस्पर भाई चारे व सौहार्द का प्रतीक है, इसलिए रंगों के इस पावन पर्व को एक-दूसरे के साथ खुशियां बांटते हुए बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाना चाहिए। राष्ट्रीय सलाहकार हरवीर सिंह रोहिला ने सभ्यता व संस्कृति के अनुरूप होली मानने के तरीके बताकर वर्चुअल मीटिंग का समापन किया ।

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