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ज्ञान भक्ति और वैराग्य

।। *श्री राधारमणो विजयते*।।
*जय गौर*
🙏🏻 *श्री गिरिराज महाराज के पावन सानिध्य में*
💢 *कार्तिक मास के पावन अवसर पर*
🔆 *श्री गोपी गीत 2017*
〽 *ज्यों की त्यों*
🗒 *नित्य नवीन रस*
♦ *वाणी:>श्री मन्माध्व गौड़ेश्वर वैष्णवाचार्य*
🌹 *पूज्य श्री पुण्डरीक गोस्वामी जी महाराज*

*श्रीगुरुदेव चरणारविन्द के कृपा आश्रय में*
*भाग* 1⃣9⃣

♦ज्ञान,भक्ति, वैराग्य को वेद-वेदान्त गीता के पाठ भी सुस्त ना कर सके भागवत् के माहात्म मात्र ने ज्ञान,वैराग्य, भक्ति को स्वस्थ ओर प्रसन्न कर दिया एक बड़ी समझने लायक बात हैं लोग तर्क करते हैं कि वृन्दावन में ज्ञान,वैराग्य बूढ़े हैं भक्ति रो रही इसका मतलब ज्ञान,वैराग्य के बूढ़े होने पर भक्ति रोदनी होती हैं वृन्दावन में तो ज्ञान,वैराग्य सदा बूढ़े रहते हैं ज्ञान को लेकर क्या करोगे?गोपी कौन से विश्वविद्यालय में पढ़ने गई जो आज गोपी ने कह दिया विश्वविद्यालय भी उस पर थीसस करते हैं। वैराग्य का भी क्या काम दुनिया छोड़ी ब्रज की प्राप्ति के लिए अब ब्रज में क्या छोड़ोगे?

♦एक आदमी कह दें आज मेरा व्रत हैं उसी समय राधारमण जी गया बेसन का लड्डू गोसाई जी ने हाथ में धर दिया आज तक तुमने व्रत किये क्यों थे? श्रीठाकुरजी की प्रसादी पाने के लिए। श्रीठाकुरजी की प्रसादी पाने में ही वोह व्रत विरोधी हो गया एक आदमी वैरागी हैं भाई हम तो सीधे-साधे कपड़े पहनते हैं उसी समय बिहारी जी गया,बिहारी जी का पटका आया चमकदार गौटेधार लटके झटके वालों तुरन्त तुम्हारे ऊपर डाल दिया ओर तुमने उतार दिया ना ना भाई ! हम नहीं पहनते। तुम्हारे वैराग्य को धिक्कार हैं जिसनें बिहारी जी के पटके को तुम्हारे कन्धे से उतरवा दिया।

♦यहाँ लौटकर व्यास जी ने संकेत किया हैं जब ज्ञान,वैराग्य को देखा तो भक्ति उस समय निश्चित अप्रसन्न हैं इस बात को नकारा नहीं जा सकता वृन्दावन की भक्ति अप्रसन्न हैं ऐसा नहीं यह वृन्दावन धाम धन्य हैं जहाँ भक्ति सतत् नृत्य करती हैं,सतत् नाचती हैं,मस्त रहती हैं तब देवर्षिनारद ने आकाशवाणी सुनी आप सत्कर्म करो तो काम बनेगा कथा प्रसिद्ध हैं नारद जी सब जगह गये उन्हें कोई यह ना बता सका सत्कर्म क्या हैं? घूमते-घूमते देवर्षिनारद बद्रीनाथ पहुंचे बद्रिकाश्रम पहुँचे सनकादिकों से उनकी भेंट हुई पूछा ऐसा कौन सा सत्कर्म हैं शुकादि जैसे श्रेष्ठ महापुरुषों द्वारा गाया हुआ *श्रीमद्भागवत* का अलाप ही वोह सामर्थ रखता हैं जो ऐसा सत्कर्म हैं इसकों तुम श्रवण मात्र नहीं समझना। *This is also welfare*
जल मनुष्य के शरीर में एक दिन तक रहता हैं,भोजन मनुष्य के शरीर में तीन दिन तक रहता हैं, यहाँ से सुनी अच्छी बात तुम्हारे जीवन में सौ वर्ष तक रह सकती हैं।

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