गुर्जर प्रतिहार वंश मूल रूप से गुर्जर है : आचार्य वीरेन्द्र विक्रम

हम आपस में ही लड़ बैठे तो देश को कौन संभालेगा, कोई बाहर वाला हमकों घर से हमे निकालेगा। इसलिए देश प्रेमियों आपस में प्रेम करो। हमे गर्व होनी चाहिए कि पत्थर पिघली है और हमारे पूर्वजों को सम्मान दिया जा रहा है। सम्राट मिहिर सनातनी राजा थे जिनके जमाने में अरबों को झांकने तक की हिम्मत न हुई। आज हम उनकी जात को लेकर आपस में क्यों भीड़ रहे है? राजपूत उसे अपना कहे गुर्जर उसे अपना कहे, पंडित उसे अपना कहे , हम तो कहे सर्व सनातन सम्राट मिहिर भोज को अपना कहे ? आखिर विवाद क्यो ?

अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा के द्वारा नोएडा मीडिया सेंटर में एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए आचार्य वीरेन्द्र विक्रम ने बताया कि दादरी मे जो गुर्जर विद्या सभा के द्वारा गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज की प्रतीमा स्थापित की जा रही है ये समस्त देशवासियों के लिए गौरव की बात है ।

प्रतीमा का अनावरण उत्तर प्रदेश के मुख्य मंत्री योगी आदित्य नाथ करेगे। गुर्जर सम्राट मिहिर भोज रघुवंशी सम्राट थे और गुर्जर प्रतिहार वंश के सबसे प्रतापी सम्राट थे जिन्होने 53 वर्षों तक अखंड भारत पर शासन किया। उनकी पहचान समाज में गुर्जर सम्राट के नाम से ही है। उनके समकालीन शासकों राष्ट्रकूट और पालो ने अपने अभिलेखों में उनको गुर्जर कहकर ही संबोधित किया है ।
851 ईसवी मे भारत भ्रमण पर आए अरब यात्री सुलेमान ने उनको गुर्जर राजा और उनके देश को गुर्जरदेश कहा है। सम्राट मिहिर भोज के पौत्र सम्राट महिपाल को कन्नड़ कवि पंप ने गुर्जर राजा लिखा है। उन्होंने बताया कि प्रतिहारो को कदवाहा, राजोर , देवली, राधनपुर, करहाड़, सज्जन, नीलगुंड, बड़ौदा के शिलालेखों में गुर्जर जाति का लिखा है।
1957 मे डॉक्टर बैजनाथ पुरी ने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से गुर्जर प्रतिहारो पर पीएचडी करी और उनको गुर्जर जाति का सिद्ध किया ।भारत के इतिहास में 1300 ईसवी से पहले राजपूत नाम की किसी भी जाति का कोई उल्लेख नहीं है। क्षत्रिय कोई जाति नहीं है , क्षत्रिय एक वर्ण है जिसमे जाट , गुर्जर , राजपूत अहीर (यादव ) , मराठा आदि सभी जातिया आती है। उन्होंने बताया की हमारे सारे प्रमाण मूल लेखो, समकालीन साहित्य और शिलालेखों पर आधारित है।
राजपूत समाज के इतिहासकार जब चाहे किसी भी टीवी चैनल पर डिबेट कर सकते है । राष्ट्रिय अध्यक्ष अनुराग गुर्जर ने बताया कि देश मे सर्वप्रथम स्वामीनारायण संप्रदाय के अक्षरधाम मंदिर दिल्ली के भारत उपवन में सम्राट मिहिर भोज की मूर्ति स्थापित करवाई गई थी वहां उनके नाम के समक्ष पट्टिका पर लिखा है महाराज गुर्जर सम्राट मिहिर भोज ।उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने लक्सर हरिद्वार मे और दिल्ली के उपमुख्य मंत्री मनीष सिसोदिया ने कोटला मुबारकपुर दक्षिण दिल्ली में गुर्जर सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा गुर्जर लिखकर स्थापित करवाई है। ये दोनो व्यक्ति ही राजपूत समाज से है। दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और जाट समाज के नेता स्वर्गीय साहिब सिंह वर्मा ने आज से 20 साल पहले दिल्ली के अंतर्गत आने वाले नेशनल हाईवे 24 के हिस्से का नाम गुर्जर सम्राट मिहिर भोज मार्ग रखवाया था।
साल 2019 मे प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के द्वारा ग्रेटर नोएडा में पुरातत्व विभाग की गुर्जर गैलरी का उद्घाटन किया गया जिसमे गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज की प्रतिमा लगी हुई है। इस गुर्जर गैलरी के निर्माण मे सांसद महेश शर्मा की एहम भूमिका थी। ग्वालियर और चंबल संभाग में आज भी गुर्जर समाज के गांवो मे गुर्जर प्रतिहार कालीन मंदिरो के अवशेष मौजूद है। इनमे बटेश्वर, नरेश्वर, बरहावली, डांग सरकार प्रमुख है। पद्म श्री के के मुहम्मद जी ने बटेश्वर मंदिर श्रंखला मुरैना का जीर्णोद्वार करवा कर इस ऐतिहासिक विरासत की रक्षा की तथा उन्होने ये भी घोषित किया ये सारे निर्माण गुर्जर प्रतिहार शासकों द्वारा करवाए गए थे।
ग्वालियर किले पर बने तेली के मंदिर और चतुर्भुज मंदिर का निर्माण भी गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज ने अपने शासनकाल मे करवाया था । इस प्रैस वार्ता का अयोजन पूर्व पार्षद अलबेल सिंह घुरैया द्वारा करवाया गया। इस अवसर पर महेश फागना, अमित खारी, पप्पू मावई, अभिनव गुर्जर, मोहित मंडार, योगेंद्र बैसोया, मोहित खारी आदि मुख्य रूप से उपस्थित थे।

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