ग्रेनो प्राधिकरण बनाई 4 ग्रुप हाउसिंग प्लाट आवंटित योजना ,राईज नें उठाए सवाल

समाज जागरण नोएडा रमन झा
ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण नें 4 ग्रुप हाउसिंग प्लाट आवंटित करने की योजना बनाई है। इस योजना के सार्वजनिक होते ही आवंटन के प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे है। शहर के विभिन्न अखबारों में छपी खबर के मुताबिक सेक्टर जीटा-1, सिग्मा 3, ईटा-2 में यह सोसायटी बनाए जायेंगे। जिसके लिए भूखंड की योजना निकाली गयी है। जिसका आधार मूल्य 32290 रुपये प्रति वर्ग मीटर रखा गया है। 18 अक्टूबर से आवेदन किया जाना तय किया गया है। मौजूदा सरकार के कार्यकाल में यह पहला ग्रुप हाउसिंग के लिए भूखंडों की योजना निकाली गयी है। लेकिन यह आवंटन प्राईवेट बिल्डर को हो या फिर किसी अर्ध सरकारी कंपनी को इस पर सवाल उठने लगे है । राईज नें कहा है बिल्डर को मिले सिर्फ फ्लैट बनाने का ठेका दिया जाय जैसा कि भूत-काल में अनुभव रहा है, कि बिल्डर घर खरीदारों से पैसा लेकर गायब हो जाते है और 10-10 साल तक उनका घर नही मिलता है।

लेकिन वर्तमान समय मे बिल्डर की दिवालिया हालत और उसके नियत को देखकर अब सवाल उठने लगे है कि आखिर क्यों नही अर्ध-सरकारी कंपनी को इसमें शामिल किया जाये और बिल्डर को सिर्फ कंस्ट्रक्शन करने का कार्य के लिए ठेका दिया जाय। नोएडा ग्रेटर नोएडा में जहाँ पर पहले से ही लाखों घर खरीदार बिल्डर को अपने खुन पसीने की पैसे देकर परेशान है वहाँ एक बार फिर से इस प्रकार के योजना कितने सफल होंगे इस पर विश्वास करना संभवत: कठिन होगा।

नोएडा के वरिष्ठ नागरिक व अधिवक्ता श्री अनिल के गर्ग नें आवंटन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जब हम जानते है कि 50 प्रतिशत से ज्यादा बिल्डर दिवालिया हो चुका है और घर खरीदार परेशान है ऐसे में एक बार फिर से यह जिम्मेदारी किसी गैर-सरकारी बिल्डर को देने के बजाय अर्ध-सरकारी कंपनी को दिया जाना चाहिए। यह योजना अच्छी है लेकिन प्राधिकरण इन भूखंडों को नीलामी के आधार पर क्यों बेचना चाहती है? एनबीसीसी, इरकॉन, हिंदुस्तान प्रीफैब लिमिटेड जैसी निर्माण कंपनियों के साथ निविदाएं क्यों नहीं आमंत्रित की गईं।

अगर ऐसा किया जायेगा तो घर खरीदारों में एक विश्वास प्रकट होगा। सबसे बड़ी बात इस प्रक्रिया के तहत प्राधिकरण को उसके भूखंड के पैसे मिल जायेंगे और बिल्डर को कंस्ट्रक्शन के पैसे, घर खरीदारों को उसके घर 3-4 साल में मिल जायेंगे। इस प्रकार से धोखाधड़ी और भ्रष्टाचार की संभावनाओं को कम किया जा सकता है। यह भी कहे तो सही है कि ऐसे में भ्रष्टाचार की कोई संभावना नही है। प्राधिकरण को केवल फ्लैटों के हिसाब से निविदाएं आमंत्रित करनी चाहिए। ग्रुप हाउसिंग प्लाट बिल्डर को नही बेचना चाहिए। क्योंकि इस समय में ज्यादा अफोर्डेबल ग्रुप हाउसिंग की जरूरत है। इस समय में दिल्ली एनसीआर में बिल्डरों के प्रति घर खरीदारों में जिस प्रकार के रोष है। उससे निपटने के लिए एक कारगर तरीका हो सकता है। योगी सरकार नें हाल ही में ट्रांसफर चार्ज को 5 प्रतिशत के घटाकर 2.5 प्रतिशत कर दिया है लेकिन इसका लाभ क्या होगा बिल्डर ने न तो लोगों को मकान नही है और नही प्राधिकरण को पैसे।

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