अधिवक्ताओं के अराजक व्यवहार से अधिकारियों की तंगी को लेकर शासन ने जारी किया पत्र

समाज जागरण
विश्वनाथ त्रिपाठी
प्रतापगढ़ | जब न्याय का प्रहरी ही अन्याय मे संलिप्त हो कर अधिकारियों, न्यायाधीशों व कर्मचारियों से अभद्र व्यवहार करने लगे तो देश व वारकरी का कल्याण कैसे सम्भव है?
न्यायालय का पावन मंदिर व न्याय व्यवस्था इन दिनों चरमरा गयी है | कहीं न कही काली कोट मे किसी षडयंत्री चोट के धब्बे अवश्य दिखाई देते हैं | न्यालय मे आए दिन वकीलों की हो रही हड़ताल, अधिकारियो से हो रहे झगड़े, वाद के प्रति उदासीनता, वादकारियो अभद्रता व पुलिस की पिटाई आम बात होती जा रही है | न्याय मंदिर से जुड़े अन्यायियो से तंग सरकार बार बार कोई न कोई चेतावनी देती रहती है लेकिन सरकार के आदेश हमेशा ठेंगे पर ही हुआ करते है |
देखने मे यहाँ तक आ रहा है कि वकीलो की एकता व अराजकता की बदौलत गाँवो मे रहने वाले पड़ोसी व भाई बंधु भी परेशान होने लगे हैं | इनके खिलाफ मुकदमा लिखने से पुलिस भी डरा करती है| इनके खिलाफ शिकायत पर अधिकारी भी संज्ञान लेने से डरा करते हैं |
आज वकील की वर्दी इतनी सस्ती हो चुकी है कि आवारा किस्म के लड़के डिग्री ले कर इसी पेशे मे पहुंचे कर वकीलों के वास्तविक सम्मान पर धूल डालने का काम कर रहे हैं|
अभी 14 मई को शासन की ओर से प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को वकीलो के व्यवहार मे सुधार के लिए पत्र भेजा गया है जिसमे सुधार के लिए ठोस कदम उठाने की बात कही गयी है | प्रश्न यह है कि बिगड़े लोगों के लिए यह पत्र कारगर होगा या फिर कोई खास उपाय होगा जिससे वकील व न्याय दोनों की गरिमा बनी रहे और अपने को ठगा समझने वाला वाद कारी भी अपने काउंसिल के प्रति विश्वस्त रहे |

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