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Good pollution and bad pollution

साभार “गुड पॉल्यूशन”,”बेड पॉल्यूशन”…?
क्या आपने कभी सोचा हैं…आखिर क्या कारण हैं कि तमाम प्रयासों के उपरांत भी आतंकवाद खत्म होने की बजाए लगातार बढ़ता जा रहा हैं…कारण हैं आतंकवाद का भी वर्गीकरण कर दिया जाना अर्थात “गुड टेरेरिज्म” और ” बेड टेरेरिज्म” में भेद…”बेड टेरेरिज्म” उस आतंकवाद को कहा जाता हैं,जब आतंकी हमले अमरीका और यूरोपियन देशों पर होते ही समस्त दुनिया आतंक के खिलाफ एकजुट हो जाती हैं जहाँ उन हमलों के सूत्र मिलते हैं,उन संगठनों एवं पोषक देशों पर तत्काल प्रतिबंध लगा दिये जाते हैं तथा बिना किसी किन्तु-परंतु के उन हमलों को मानवता के विरुद्ध मानकर उन पर कठोर कदम उठाए जाते है क्योंकि वो “बेड टेरेरिज्म” हैं…!
इसके उलट “गुड टेरेरिज्म” से आशय उस आतंकवाद से है,जिसमें पीड़ित देश भारत और एशियन,अफ्रीकन जैसे तीसरी दुनिया के देश हो अतः इन देशों पर हुए आतंकी हमलों पर दुनिया तत्काल प्रतिक्रिया नही करती…खासतौर से भारत जैसे देशों में इन हमलों को जस्टिफाई किया जाता हैं मसलन बुरहान गरीब था जैसे…किन्तु…परन्तु किये जाते हैं क्योंकि ये “गुड टेरेरिज्म” हैं…आतंकवाद पर इसी दोगलेपन की वजह से आज भी तमाम प्रयासों के उपरांत भी आतंकवाद जस का तस हैं…!
ऐसा ही होता हैं “गुड पॉल्यूशन” और “बेड पॉल्यूशन”…लगातार तीसरे वर्ष भी दीपावली के पटाखों पर बैन होने तथा इस वर्ष दिल्ली मे दीपावली पर फूटने वाले पटाखों में तीस % कमी होने के बाबजूद प्रदूषण घटने की बजाए बढ़ना प्रदूषण चिंतको,पर्यावरण प्रेमियों और मिलार्ड के पाजामे(एजेंडे) के नाडे खोल गया…?
गुड और बेड में आप समस्या की जड़ पर प्रहार नही करते अपितु टहनियों पर वार करके समय और संसाधन दोनो ही बर्बाद करते हैं…समस्याओं का वृक्ष सदैव हरा भरा रहता है…पिछले तीन वर्षों से भारत मे प्रदूषण के नाम पर यही “गुड पॉल्यूशन”,”बेड पॉल्यूशन” वाला खेल खेला जा रहा हैं जिसमें प्रदूषण चिंतक,पर्यावरण प्रेमी से लेकर सम्पूर्ण तंत्र शामिल हैं उदाहरणार्थ दीपावली के पटाखो से होने वाला प्रदूषण “बेड पॉल्यूशन” हैं अतः दीपावली आते ही समस्त प्रदूषण चिंतकों, पर्यावरण प्रेमियों द्वारा कोर्ट मे याचिकाएं लगाई जाती हैं देशभर में दीपावली पर पटाखे न फोड़े के अभियान चलने लगते हैं समस्त जनता और सूचना तंत्र भी एकजुट हो जाते हैं अतः मिलार्ड भी सभी मुकदमे छोड़ तत्काल दीपावली पर पटाखे बैन कर देते हैं
क्योंकि ये “बेड पॉल्यूशन” हैं…इसके ठीक विपरीत क्रिसमस,नए साल पर फूटने वाले पटाखे एवँ दीपावली के आसपास खेतो में जलने वाली पराली से होने वाला प्रदूषण “गुड पॉल्यूशन” हैं अतः इन्हें जस्टिफाई किया जाता हैं मसलन क्रिसमस आस्था का सवाल हैं…पराली जलाना मजबूरी हैं इत्यादि…
उल्लेखनीय हैं कि “बेड पॉल्यूशन” पर अकाट्य तर्क दिया जाता हैं :- जान ही नही रहेगी तो दीपावली क्या मनाओगे लेकिन “गुड पॉल्यूशन” पर ये तर्क गायब हो जाता हैं…?


गुड और बेड के इस खेल में मूल समस्या कही खो जाती हैं जैसे ठीक दीपावली पर दिल्ली मे प्रदूषण बढ़ने का एक बड़ा कारक पराली भी था अतः पटाखे और पराली दोनो पर बैन होना चाहिये था पराली जलाने के विकल्प खोजे जाने थे लेकिन पराली “गुड पॉल्यूशन” हैं अतः सरकार द्वारा हलफनामे मे “दिल्ली प्रदूषण इमरजेंसी” का कारण पराली बताये जाने के बाबजूद,मिलार्ड तीन दिन से कानो में रुई और मुँह में दही ठूँस कर बैठे है क्योंकि यह “गुड पॉल्यूशन” हैं…प्रदूषण पर कैसे नियंत्रण किया जाता हैं ये चीन से सीखिए एक समय चीन के शहर सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में गिने जाते थे लेकिन चीन ने प्रदूषण को गुड और बेड में नही बांटा उन्होंने जड़ पर प्रहार किया शंघाई जैसे सर्वाधिक प्रदूषित शहर में उद्योगों को शहर से बाहर किया फैक्ट्रीज में फिल्टर युक्त चिमनिया लगाई पुराने वाहनों को तत्काल बन्द किया…साथ ही टेक्नोलॉजी का प्रयोग कर शहर मे कुतुबमीनार से भी ऊँची चिमनी बनाई जिससे धुंआ बाहर निकल गया…जिसका नतीजा ये निकला कि आज बीजिंग,शंघाई जैसे शहरों के प्रदूषण में आश्चर्यजनक रूप से कमी आ चुकी हैं…वही दूसरी औऱ दिल्ली मे प्रदूषण रोकथाम के नाम पर हम मात्र दीपावली के पटाखे बैन कर,टेंकरो से जल का छिड़काव कर,”ऑड-इवन” चलाकर अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर प्रसन्न हो रहे है नतीजा आज दिल्ली गैस का चेम्बर बन चुकी हैं…अतः यदि सच मे हम दिल्ली के प्रदूषण के प्रति गम्भीर हैं हम उसे कम करना चाहते है,तो सबसे पहले हमें प्रदूषण को “गुड पॉल्यूशन” और “बेड पॉल्यूशन” में बांटना बन्द करना होगा…दीपावली के साथ(अकेले दीपावली पर बैन एजेंडा हैं) बिना किसी किन्तु-परन्तु के सभी त्योहारों क्रिसमस,नए साल,शब ए बारात पर पटाखे बेन करना होंगे…शीघ्र-अतिशीघ्र पराली जलाने का विकल्प ढूंढ(किसानों के अहित बिना)जलाने पर बैन लगाना होगा तथा चीन जैसे कोई टेक्निकल उपाय अपनाना होगा…अन्यथा प्रदूषण चिंतकों,पर्यावरण प्रेमियों के “गुड पॉल्यूशन” और “बेड पॉल्यूशन” के एजेंडे में उलझे रहे तो दीपावली और दिल्ली दोनो हमारे हाथ से निकल जाएगी…??

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