नालों में डंप होता है कूड़ा-कचरा, सफाई में दिक्कत ।

नवादा:-साल दर साल नवादा शहर का आकार बढ़ रहा है। नहीं बढ़ रही है, तो नागरिकों के लिए सुविधाएं। सड़कें संकरी हुई हैं, नाले भी 25 से 30 साल पुराने हैं। जिला मुख्यालय के विभिन्न इलाकों से गंदे पानी के निकास को इन दो-तीन दशक पुराने नालों पर ही भरोसा है। यूं तो शहर से गंदे पानी की निकासी को छह प्रमुख नाले हैं। लेकिन सफाई कुछ की ही हो पाती है। अन्य नालों की साफ-सफाई में खानापूर्ति होती है। छह प्रमुख नालों में एक है, नारदीगंज मोड़ से पुरानी कचहरी रोड, अनुमंडल कार्यालय, थाना रोड, डीएम आवास होते हुए खुरी नदी तक बना नाला। इस नाले की लंबाई करीब 6,688 फीट है। जिसकी सफाई को लेकर वित्तीय वर्ष 2020-21 में ईं-टेंडरिंग की प्रक्रिया के तहत कार्यादेश दिया गया। 19-20 महीने पहले कार्य भी शुरु हुआ, लेकिन सफाई पूरी होने में लंबा समय लगा। स्थिति यह है कि एकाध बार की मूसलाधार बारिश में नाले के आसपास रही सड़क पर पानी जम जाता है। लेकिन नाली से पानी का निकास नहीं हो पाता। पूरे बरसात सड़कों पर जलजमाव होता है। लेकिन नगर परिषद पर्याप्त ध्यान नहीं देता। साफ-सफाई और देखरेख के अभाव में नाला बदहाल है।वित्तीय वर्ष 2020-21 में शहर के छह प्रमुख नालों की सफाई को टेंडर निकाला गया। टेंडर प्रक्रिया के बाद इस नाले की भी सफाई हुई। कई जगहों पर नाले की सफाई के दौरान मरम्मत भी की गयी। लेकिन साल बीतते-बीतते जलजमाव की समस्या फिर से मुंह बाए खड़ी है। कारण है नागरिकों की लापरवाही भरा रवैया। आमतौर पर सब्जी मंडी, पुरानी कचहरी रोड और अनुमंडल कार्यालय के पास नाले में ही दुकानदार कूड़ा-कचरा बहा देते हैं। थर्मोकोल की प्लेट, प्लास्टिक ग्लास, थैलियां आदि से नाला भरा रहता है। सफाई के नाम पर कभी-कभी काम होता है। जिससे नाले भर जाते हैं। समस्या बढ़ती है, तब वृहद पैमाने पर सफाई कार्य होता है। अमूमन बरसात में शहर की सड़के जलमग्न होती है। नगर परिषद थोड़ी बहुत सफाई करा खानापूर्ति करने का काम करता है।

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