मौलिक भारत व दिल्ली एनसीआर की प्रमुख बायर्स व आरडबल्यूए संस्थाओ ने आयोजित किया मौलिक जन संवाद – आगामी संघर्ष हेतु बनाया संयुक्त मोर्चा

दिल्ली एनसीआर (गौतमबुद्ध नगर सहित) व देश के स्ट्रेस प्रोजेक्ट ( लटके हुए बिल्डर प्रोजेक्ट) के लिए बने राष्ट्रीय नीति

नेताओ-सरकारी बाबुओं- बिल्डरों के गठजोड़ के खिलाफ व आम निवेशकों के हित में साथ आए मौलिक भारत व जिला गौतमबुद्ध नगर सहित दिल्ली एनसीआर की प्रमुख आरडबल्यूए व बायर्स एसोसिएशन फोनरवा, नेफोमा, फोना, नोफ़ा, नेफोवा, डीडीआरडबल्यूए, राइस एनजीओ आदि मिलकर बनाया संघर्ष हेतू बनाया संयुक्त मोर्चा। आम बायर्स के मुद्दे पर अक्सर सरकार सिर्फ जांच करवाती है लेकिन कोई भी कारवाई नही किया जाता है। ज्यादातर प्रोजेक्ट में प्राधिकरण अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लेती है, जबकि प्राधिकरण की जिम्मेदारी है कि वह लोगों के हितों की रक्षा करे और बिल्डर प्रोजेक्ट के नाम पर चल रहे पोंजी स्कीम से आम भोले-भाले बायर्स को बचाये।

मौलिक भारत व जिला गौतमबुद्ध नगर सहित दिल्ली एनसीआर की प्रमुख आरडबल्यूए व बायर्स एसोसिएशन फोनरवा, नेफोमा, फोना, नोफ़ा, नेफोवा, डीडीआरडबल्यूए, राइस एनजीओ आदि की पहल पर नेताओं-सरकारी बाबुओं- बिल्डरों के गठजोड़ के खिलाफ व आम निवेशकों के हित में समस्याओं के समाधान के लिए कुछ रचनात्मक व सकारात्मक उपाय ढूंढने के लिए दिल्ली एनसीआर की प्रमुख संस्थाओं (गौतमबुद्ध नगर सहित दिल्ली एनसीआर के स्ट्रेस प्रोजेक्ट ( लटके हुए बिल्डर प्रोजेक्ट) से जुड़े निवेशकों के संगठनों जो बायर्स के हितों के लिए प्रभावी कार्य कर रहीं हैं ) व अन्य प्रमुख सामाजिक संस्थाओ के अनुभव व सुझावों को साझा करने व सम्मिलित कार्ययोजना बनाने के लिए 26/9/2021 , रविवार को अग्रसेन भवन, नोएडा में दोपहर 2 बजे से सायं 6 बजे के बीच मौलिक जन संवाद का आयोजन किया। सभी संस्थाओं ने व्यापक विमर्श के बाद लटकी हुई बिल्डर्स परियोजनाओं के सबके द्वारा स्वीकृत “स्थायी समाधान प्रक्रिया” के निर्माण हेतु संयुक्त रूप से निम्न पाँच सूत्रीय व्यक्तव्य जारी किया :

1) सभी संस्थाओं ने मिलकर एक पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है। यह समिति आज के जन संवाद में आए सभी सुझावों को समाहित कर एक संयुक्त प्रतिवेदन तैयार करेगी और इस प्रतिवेदन को आगामी कार्यवाही की अपेक्षा के साथ केंद्र व राज्य सरकारों सहित सभी प्राधिकरणों, संवैधानिक संस्थाओ आदि को भेजा जाएगा।

2) तमाम संवैधानिक शक्तियों के बाद भी प्राधिकरण व स्थानीय निकाय बिल्डर प्राजेक्ट्स में अपनी जवाबदेही से हाथ झाड़कर खड़े रहते हैं, यह संविधान की मूल भावना के विपरीत है । सभी संस्थाएँ नियमित रूप से मिलती रहेंगी और नेताओं-सरकारी बाबुओं- बिल्डरों के गठजोड़ के ख़िलाफ़ व आम निवेशकों के हित में मिलकर संघर्ष करेंगी। अगर आवश्यक हुआ तो जमीनी संघर्ष व आंदोलन भी शुरू किया जाएगा और न्यायालय में पीआईएल भी दायर की जाएगी।

3) सभी संस्थाओं का मानना है कि केंद्र/राज्यों/प्राधिकरणों/ स्थानीय निकायों सभी के नियमो व कार्यप्रणाली में व्यापक अस्पष्टता, ख़ामियाँ व अधूरापन है जिससे जहां बिल्डरों को फायदा मिलता है वहीं आम निवेशक के हितों पर चोट पड़ती है वही व्यापक भ्रष्टाचार व कर चोरी का साम्राज्य खड़ा हो जाता है। देश और समाज के हित में व सुशासन की स्थापना हेतु इस दिशा में एक राष्ट्रीय नीति बनाए जाने की आवश्यकता है। सभी संस्थाओं द्वारा भेजा जाने वाला प्रतिवेदन इस नीति को बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

4) देशभर में और विशेषकर गौतमबुद्ध नगर में सैकड़ों बिल्डर प्रोजेक्ट अटके हुए हैं और जिन में फ़्लैट दिए भी गए हैं उनमें भी नियम कानूनों का उल्लंघन व घटिया निर्माण सामग्री के प्रयोग के साथ ही निवेशक से किए गए अधिकांश वादों को पूरा नहीं किया गया। संयुक्त मोर्चा इन दोनो ही समस्याओं पर मिलकर संघर्ष करेगा।

5) मौलिक जनसंवाद में उभर कर आया कि देश में सबसे ज़्यादा भूमि व बिल्डर संबंधी घोटाले ही होते हैं। गौतमबुद्ध नगर या देश के किसी भी जिले में चाहे किसी भी राजनीतिक दल की सरकार हो , नेताओं-सरकारी बाबुओं- बिल्डरों के गठजोड़ के आगे वो नतमस्तक रहती है और चुनावी चंदे व कमीशन के लालच में इस गठजोड़ को शह देती है। जिस कारण प्राधिकरण व अन्य अधिकार प्राप्त एजेंसी आँखे बंद किए रहती हैं। वे अपने क़ानून प्रदत्त अधिकारों का प्रयोग नहीं करते , पैसों के लालच में बिक जाते हैं और जानबूझकर शिकायतों को सुलझाने का प्रयास नहीं करते। इसलिए इन पर नियंत्रण के लिए एक संवैधानिक और स्वायत्त संस्था की आवश्यकता है।

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