मक्कार हरियाणा सरकार और मोदी जी की “स्मार्ट सिटी योजना”

मक्कार हरियाणा सरकार और मोदी जी की “स्मार्ट सिटी योजना”

दिल्ली एनसीआर में प्राधिकरण व नगर निगम ही नहीं सरकारें भी उतनी ही बेईमान, भ्रष्ट व निकम्मी हैं। पूरा दिल्ली और एनसीआर अवैध बस्तियों व निर्माण से अटे पड़े हैं और यह क्षेत्र एक “शहरी देहात” में बदल कर बड़ी प्रदूषण व पर्यावरण समस्या को जन्म दे चुका है। ताज़ा उदाहरण हरियाणा के फ़रीदाबाद का है जहां के दिल्ली से लगे सूरजकुंड क्षेत्र में अवैध बस्तियाँ, फार्म हाउस, सोसाइटी स्कूल ,कालेज और होटलो की भरमार है। अरावली की पहाड़ियों के वन क्षेत्र में ये निर्माण पिछले तीन दशकों में अवैध रूप से राज्य सरकारों के इशारे पर , राजनेताओ, नोकरशाहो व दबंगो को वन विभाग व नगर निगमो की मिलीभगत से क़ब्ज़ा करने दिए जाते रहे और देखते ही देखते लाखों लोग फ़रीदाबाद से गुरुग्राम तक के इस वन क्षेत्र में बसते गए वो भी बिना किसी कागज के।आज यहाँ जगह की क़ीमत एक लाख रुपए वर्ग मीटर है और सेकड़ो लोगों के पास सौ सो करोड़ तक की ज़मीन क़ब्ज़े में है वो भी बिना किसी काग़ज़ी कार्यवाही के। आप अंदाज़ा लगा सकते हो की कितने लाख करोड़ रुपयों का यह घोटाला चल रहा है और क्या क्या बंदरबाँट रोज़ होती होगी। कितनी मज़ेदार बात है कि बिना रजिस्ट्री व काग़ज़ के भी ये सभी निर्माण सरकार वैध मान रही है और यहाँ बिजली , पानी, सड़क, सीवर, पार्क व अन्य सभी सुविधाएँ दे रही है।भारत में शहरीकरण एक अभिशाप की तरह है। सरकारें, निगम व प्राधिकरण अपनी काली कमाई के लिए अवैध निर्माण को शह देते हैं और बेतरतीब , अराजक और लूट के प्रतीक शहर बस जाते हैं , भगवान भरोसे। ताज़ा मामला इसलिए प्रकाश में आया क्योंकि एक एनजीओ सूरजकुंड के राजहंस होटल से लगे खोरी गाँव में बनी अवैध बस्ती को हटाने के लिए उच्चतम न्यायलय गयी थी और न्यायलय के आदेश पर दस हज़ार अवैध मकान निगम को तोड़ने भी पड़े। बताया जा रह है कि एक बड़े कारपोरेट समूह ने राजहंस होटल ख़रीद लिया है और इसीलिए उसकी रुचि उस अवैध बस्ती को हटाने में थी। चूँकि अवैध बस्ती हट चुकी है तो राज्य सरकार मामला रफ़ा दफ़ा करने की कोशिश कर रही है और मक्कार सरकार कोर्ट में अजीबोगरीब तर्क दे रही है। जानकर यह भी बता रहे हैं कि भूमाफ़ियाओ जिन्होंने सेंकडो करोड़ की ज़मीन क़ब्ज़ा की हुई हैं, ने बहुत मोटी रक़म नीचे से ऊपर तक खिला दी है और बड़ी बात नहीं कि न्यायालय भी कान में रुई डाल कर न सो जाए। क्योंकि बाज़ार अर्थव्यवस्थाओं में न्याय पैसे वालो का ग़ुलाम होता है।

ऐसे में प्रधानमंत्री जी किन”स्मार्ट सिटी” योजना एक मजाक बन कर ही रह जानी है। मौलिक भारत पूछता है कि क्या मोदी जी इस महा घोटाले का संज्ञान लेंगे?
अनुज अग्रवाल
अध्यक्ष, मौलिक भारत

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