fbpx

मछुआ और मंत्री

एक राजा था। उसे रोज तुरंत पकड़ी गई मछलियाँ खाने का शौक था। एक दिन समुद्र में भयंकर तूफान आया। कोई भी मछुआ समुद्र में मछली मारने नही गया। इसलिए राजा को तुरंत पकड़ी हुई मछली नही मिल सकी। राजा ने घोषणा करा दी। कि उस दिन जो भी तुरंत पकड़ी हुई मछली राजा के पास लाएगा। उसे भरपूर इनाम दिया जाएगा। एक गरीब मछुए ने यह घोषणा सुनी जान जोखिम में डालकर समुद्र से मछलियाँ पकड़ी और राजमहल पहुँचा राजमहल के पहरेदारो ने उसे फाटक पर रोक दिया वे उसे राजा के मंत्री के पास ले गए।
मंत्री ने मछुए से कहा, “मैं तुम्हे राजा के पास जरूर जाने दूँगा पर तुम्हे राजा से जो ईनाम मिलेगा। उस में आधा हिस्सा होगा।” मछुए को मंत्री का यह प्रस्ताव पसंद नही आया। फिर भी उसने मन मारकर उसे स्वीकार किया।

इसके बाद पहरेदार उसे लेकर राजा के पास गए। मछुए ने राजा को मछलियाँ दी। राजा मछुए पर बहुत प्रसन्न हुआ। बताओ क्या इनाम चाहिए। तुम जो माँगोगे वह मैं तुम्हे अवश्य दूँगा। मछुए ने कहा, “महाराज मैं चाहता हूँ मेरी पीठ पर पचास कोड़े लगाए जाएँ। बस मुझे यही इनाम चाहिए।” मछुए की यह बात सुनकर सभी दरबारी चकित रहगए। राजा ने मछुए की पीठ पर पचास हल्के कोड़े लगाने का आदेश दिया जब नौकर मछुए की पीठ पर पच्चीस कोड़े लगा चुका। तो मछुए ने कहा, “रूको! अब बाकी के पच्चीस कोड़े मेरे साझेदार की पीठ पर लगाओ।” राजा ने मछुए से कहा, “तुम्हारा हिस्सेदार कौन है?”

मछुए ने कहा,”महाराज आपके मंत्री महोदय ही मेरे हिस्सेदार है।”
मछुए का जवाब सुनकर राजा गुस्से से तमतमा उठा। उसने मंत्री को अपने सामने हाजिर करने का आदेश दिया।
मंत्री के सामने आते ही राजा ने नौकर को आदेश दिया इन्हे गिनकर पच्चीस कोड़े लगाओ ध्यान रखो। इनकी पीठ पर कोड़े जोर जोर से लगने चाहिए। इसके बाद राजा ने बेईमान मंत्री को जेल मे डाल दिया। फिर राजा ने मछुए को मुँहमाँगा इनाम दिया।

शिक्षा -जैसी करनी वैसी भरनी।

Please follow and like us:
%d bloggers like this: