9 दिन बाद भी बुलंदशहर की बेटी को नही मिला इंसाफ, परिजनों नें लगाया पुलिस पर आरोपी को बचाने का आरोप

समाज जागरण नोएडा

क्या योगी सरकार में 9 दिन बाद भी एक बेटी की हत्या या आत्महत्या की गुत्थी सुलझाने में नोएडा पुलिस नाकाम रहती है और जब परिजन आक्रोश और अपनी मांगों के लेकर नोएडा पुलिस आफ कमीशनरेट की रुख किया तो उनको जबरन रोक दिया गया। घंटो गहमागहमी के बाद फिर से पुलिस नें मांग दो दिन का समय। मंगलवार को परिजन फिर करेंगे कमीशनरेट का घेराव या पुलिस गुत्थी सुलझाने में रहेगी कामयाब यह तो आने वाले मंगलवार को ही पता चलेगा फिलहाल तो परिजन नें पुलिस पर आरोपियोंं को बचाने का आरोप लगाया है।
मामला सेक्टर 100 की जहाँ पर बुलंदशहर की एक बेटी की अचानक मौत हो जाती है। होली के एक दिन बाद यह कहकर मालिक ने बुलाया कि आज कोई स्पेशल गेस्ट आने वाले है, जिसके लिए खाना बनाना है। क्या पता था कि स्पेशल गेस्ट एक गरीब बेटी जो कि झाड़ू पोछा और खाने बनाने की काम करती उसके लिए यमराज बनकर आया है। लड़की के परिजनों का कहना है कि रेप के बाद हत्या की गई है जबकि मालिक का कहना है कि आठ मंजिला इमारत से गिरकर मौत हुई है। पुलिस के सामने अब यही कशमकश है कि आखिर माने तो किसका ?
बात तो साफ है साहब, आखिर कोई लड़की आठवी मंजिल से कुदकर अचानक जान क्यों देगी। आखिर उसके साथ में ऐसा क्या हुआ था जो कि उसको यह करने पर मजबूर होना पड़ा ? दूसरा थ्योरी अगर पुलिस और घर वाले इसके साथ में पोस्टमार्टम रिपोर्ट कि माने तो कही भी चोट की निशान नही है न सिर फटा है न पैर टुटा है। कोई कोई खुन बहने की निशान है तो फिर मौत के कारण क्या है ? घर वालों का कहना है कि तीन घंटे पहले बात हुई तो ठीक थी, तो आखिर ऐसा क्या हुआ कि अस्पताल ले जाना पड़ा ? परिजनों नें बताया है कि मालिक का फोन आया कि इसकी तबियत खराब है इसे अस्पताल ले जा रहे है, क्या उससे पहले कूद चुकी थी और मौत हो चुके थे या फिर अस्पताल में जाकर बेटी की मौत हुई। पुलिस को इस मामले में सुलझाने होंगे कई गुत्थी। फिलहाल परिजन को इंसाफ चाहिए अपने बेटी के लिए जो सोसायटी में काम करने गयी थी लेकिन जब लौटी को लाश बनकर। इसी मांग को लेकर नोएडा सेक्टर 82 में बड़ी संख्या में लड़की के परिजन और गाँव वाले इकट्ठा होकर पुलिस कमीशनरेट जाने के लिए पहुंचे लेकिन रास्ते में ही रोक दिया गया। नोएडा के ही राजकुमार भाटी नें पुलिस पर बड़ा आरोप लगाया है और कहा कि पुलिस आरोपी को बचाना चाहती है। जब केस 302 और 376 मे दर्ज किया गया है तो पुलिस को चाहिए था कि आरेस्ट करे लेकिन ऐसा नही किया गया है। हालांकि पुलिस के सामने यह भी उलझन है कि आरोपी एक फौजी है जिसमें पुलिस को कानूनी उलझन को सुलझाने मे समय लग रहा है या फिर पक्के सबूत की तलाश हो।

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