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ई.एस.आर.(ESR) या लाल रक्तकण तलछटी करण दर(erythrocyte sedimentation rate.)

ई.एस.आर.(ESR) या लाल रक्तकण तलछटी करण दर

रक्त को निकालने के पश्चात स्कन्दनरोधी पदार्थ (Anticoagulant) डालकर किसी पात्र में रखने पर सीधी (खड़ी ट्यूब या पिपेट में) रक्त के लाल कण पात्र की तली में नीचे बैठ जाते हैं जिसको तलछटीकरण या इरिथ्रोसाइट सैडीमेन्टेशन रेट कहते हैं। इसी को संक्षेप में ई. एस. आर. भी कहते हैं। लाल रक्त कणों के नीचे बैठने को प्रथम घण्टा के अन्त में मिली मीटरों में व्यक्त किया जाता है।
When anticoagulated blood is allowed to stand undisturbed in a vertical tube the red cells tend to fall to the bottom forming tow layers – the lowered cell layer and the upper psasma plasma layer. This occurs in three stages. It is the sedimentation of R.B.C. to the length of plasma.
वक्तव्य – लाल रक्तकण (R.B.C.) प्लाज्मा से भारी होते हैं। इनका आपेक्षिक घनत्व 1090 और प्लाज्मा का 1030 होता है। शरीर में रक्त भ्रमण करता रहता है और प्लाज्मा तथा कण (cells) मिले रहते हैं पर जब रक्त को शरीर से बाहर निकाल कर किसी ट्यूब या पिपेट में रख दिया जाता है तो लालरक्तकण नीचे तली में बैठ जाते हैं।

E S R
रक्त को किसी उपयुक्त स्कन्दनरोधी (यथा आँक्जलेट मिश्रण, ट्राईसोडिम साइट्रेट, एसिड नाइट्रेट डैक्स्ट्रोज घोल ई.डी.टी.ए. या हेपेरिन) को मिलाकर जिससे वह जम न सके, किसी स्टैण्ड में सीधी फिट हुई तंग आन्तरिक व्यास वाली काँच की अंशांकित ट्यूब में रखा जाता है। कमरे के तापमान को नोट कर लिया जाता है। जैसे-जैसे कण (कोशिकायें) नीचे बैठती जाती हैं प्लाज्मा की ऊपरी परत लाल रक्तकणों से साफ होती जाती है।
एक घण्टे के अन्त में तथा दूसरे घण्टे के अन्त मे कितना प्लाज्मा साफ हो गया है अर्थात् उसके कण नीचे बैठ गये हैं, उसे नोट कर लिया जाता है। यही लाल रक्तकण तलछटीकरण दर (ESR) है।

सारांश – यदि जमावरोधक युक्त रक्त को एक परखनली में डालकर सीधा खड़ा रख दिया जाये तो लाल रक्तकण धीरे-धीरे नीचे बैठ जाते हैं और ऊपर केवल प्लाज्मा रह जाता है। यह अवसादन क्षमता यदि निर्धारित समय के अनुसार मापी जाये तो उसे ई.एस.आर. कहते हैं।
इसकी जाँच 2 विधियों से की जाती है।
1.वेस्टरग्रेन विधि (Westergren method)
2.विन्ट्रोव विधि (Wintrobe method

प्रोयोग विधि:-
एक स्वच्छ परखनली में सोडी साइट्रास (sodi citras) का 1/2मि.ली.(0.5ml) घोल लिया जाता है। साथ ही रोगी की शिरा (vein) से 5मि. ली. रक्त निकाल कर 4.5 मि.ली. रक्त इस परखनली में डाला जाता है। तत्पश्चात् परखनली को हिला कर रक्त और घोल को अच्छी तरह मे मिला लिया जाता है। इसके बाद वेस्टरग्रेन ट्यूब में 0 चिन्ह तक इस रक्त को खींच कर ट्यूब की स्टैण्ड पर सीधा खड़ा किया जाता है और समय भी नोट कर लिया जाता है। धीरे-धीरे लाल रक्त कण (RBC) नीचे बैठने लगते हैं और ऊपर का जल (प्लाज्मा) साफ होता जाता है। एक घण्टे के बाद ट्यूब का निरीक्षण करें। इस समय 0 चिन्ह से कहाँ तक ट्यूब के नीचे लाल रक्त कण बैठे होंगे वहाँ तक प्लाज्मा जल के समान साफ होगा और उसके नीचे का रंग लाल होगा। अब इंन दोनों स्तरों के मिलने के स्थान को लिख लिया जाता है, वह संख्या ई.एस.आर. कहलाती है।
Take 0.5 ml of 3.8% citrated solution in dry vial, collect exactly 4.5 ml of Blood from the vein without air bubble and put the whole into the vial containing citrate solution; mix thoroughly. Drao well-mexed citrated Blood into the the westergren pipette up to the mark o. The pipette being between these two fixtures without leakage.
The length of the plasma from o to the upper level of the red cell column indicates the sedimentation of R.B.C. Take the reading after one hour and 2hours.

मान लिया कि रोगी का लाल रक्तकण (R.B.C) एक घण्टे के बाद में 40 मि.मी. लालरक्त कण नीचे बैठता है तो प्रथम संख्या (20) को व्दितीय संख्या (40) को आधा करके प्रथम संख्या (20) के साथ जोड़ दिया जाता है। जोड़ने पर संख्या 40 अती है। 40 संख्या को 2 संख्या से भाग देने पर जो फल आता है वही संख्या ई.एस.आर. औसत मान कहलाता है।

When ESR level descends to 100 mm or more, the second hour reading should not be taken.
If the reading of the Ist hour crosses 100mm, usually it recindl the following 3 diagnosis sequentially :
(a) Tuberculosis,
(b) Cancer, and c
(c) Rheumafoid arthritis

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