नोएडा प्राधिकरण एसीओ के निर्देश के बावजूद सेक्टर 59 में किया वेंडरो नें किया पूराने जगह पर अतिक्रमण

नोएडा में प्राधिकरण से बड़ा है माफिया । प्राधिकरण के आदेशों को क्यों ठेंगा दिखा रहे है सर्किल आफिसर और जेई ? आफिस में बैठकर होगा वेंडर का सर्वे तुम वेंडर को आफिस में ले आओं। टाउन वेंडिंग कमेटी वाले आफिसर के कैविन में करवायेंगे वेंडर का सर्वे। अतिक्रमण के नाम पर लाईसेंसी वेंडर को किया जा रहा है परेशान। अवैध वेंडर को कोई छू तक नही रहा है। क्या नोएडा शहर में अपना काम करने वालों को राजनीतिक शरण लेना पड़ता है।

नोएडा प्राधिककरण के सीओ और एसीओ एक तरफ तो नोएडा को अतिक्रमण मुक्त करने की बात करती है। वही दूसरी तरफ उनके जेई और सर्किल आफिसर मनमानी तरीके से अतिक्रमण करवा रहे है। नोएडा सेक्टर 59 जो कि बहुत ही विवादित रहा है। दुकान कैंसिल होने के बाद भी वहाँ पर सर्किल आफिसर और जेई के मदद से 2 साल से ज्यादा दुकान चलता रहा है। बताया तो ये भी गया कि वहाँ पर चल रहे सभी दुकान किसी एक ही परिवार के नाम पर है या फिर आपस में सभी एक दूसरे के रिलेशन में है।
उनमें से बहुत से लोग ऐसे थे जिसका तो रेहड़ी पटरी व्यवसाय से कुछ लेना देना ही नही था, फिर उनके नाम पर नान वेंडिंग जोन में 7 दुकाने चलती रही। उसको रेहड़ी पटरी कहेंगें तो तौहिन होगा इसलिए वहाँ पर चल रहे होटलनुमा रेस्टोंरेंट रात के समय में भी खुला रहता था। जबकि किसी भी रेहड़ी पटरी के व्यवसाय करने वालों को नियम के अनुसार सुबह के 6 बजे से रात के 10 बजे तक ही दुकान लगाने की अनुमति दी गयी है। कोरोना के समय में जब सारे रेहड़ी पटरी व्यवसाय बंद या कहे ठप्प था उस समय में भी इस वेंडिग जोन में चल रहे रेस्टोंरेंट गुलजार हुआ करता था।

बढ़ते विवाद को देखकर प्राधिकरण नें वहाँ के वेंडिंग जोन को शिफ्ट कर दिया। लेकिन आज प्राधिकरण के निर्देषों को ठेंगा दिखाते हुए पूराने जगहों पर दुकान गुलजार होने लगा है। राजनीतिक में शामिल होने का मकसद देश या समाज सेवा से ज्यादा निजी स्वार्थों को सिद्ध करना होता है। क्योंकि रेहड़ी पटरी के ठेकेदार बीजेपी के सदस्य है तो पुलिस वाले भी विवाद होने पर सिर्फ समझौता करने की बात करके छोड़ देता है। जबकि आज ही प्राधिकरण वालों ने गरीब रेहड़ी पटरी वालों के तिरपाल को फाड़ दिया और उसका सामान भी उठा लिया है। उल्टे वेंडर को धमकाते हुए दिखे प्राधिकरण कर्मचारी।

प्राधिकरण के एसीओ श्रीमती नेहा शर्मा नें अधिकारियों को अफसरों को निर्देश दिया था कि जो अतिक्रमण हटा दिया गया वहाँ कोई दूबारा न लौटे। इसके अलावा विशेष अधिकारी नें भी बड़े पैमाने पर अतिक्रमण को लेकर सभी सर्किल आफिसर को पत्र जारी किया था और तीन दिनों मे जबाब मांगा था। प्राधिकरण के सीओ ने सर्किल आफिसर को निर्देश है कि सभी सर्किल अतिक्रमण मुक्त होना चाहिए। लेकिन अभी तक सिर्फ उन वेंडरों को ही परेशान किया गया है जिनके पास में लाईसेंस है। नोएडा सेक्टर 41 का मामला कुछ भी कुछ ऐसा ही है।

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