ई श्रमिक कार्ड बनाने वाले श्रमिक कार्ड मानक/ पात्रता की उड़ा रहे धज्जियां*

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राहुल सिंह ब्यूरो चीफ

लखीमपुर खीरी:- सरकार द्वारा समय-समय पर जन कल्याणकारी योजनाओं को लागू किया जाता है उसी जन कल्याणकारी योजना में एक योजना है ई श्रमिक. ई श्रमिक कार्ड गरीब मजदूर, ठेले वाले, मोची, कुम्हार, बढ़ाई, पेंटर , प्राइवेट ड्राइवर, सभी प्रकार के प्राइवेट मजदूर, कोचिंग पढ़ाने वाले, दुकानदारों की सहायता करने वाले लड़के, छोटे स्तर के मकैनिक, बढ़ाई लोहार, मिट्टी खोदने वाले, कुआं खोदने वाले, छप्पर डालने वाले, ईटा पाथने वाले, सिलाई कढ़ाई करने वाले, होटल के वेटर-बेरा कुली, पल्लेदार, गरीब नाई सभी प्रकार के दिहाड़ी मजदूर आदि भिन्न-भिन्न प्रकार के मजदूर तथा गरीब व्यक्तियों के लिए सरकार द्वारा ई श्रमिक कार्ड योजना का शुभारंभ किया गया है और जिसको सरकार द्वारा जन सेवा केंद्र या सीएससी सेंटर से बनाने के लिए अधिकृत किया गया. जिससे गरीब असहाय मजदूर का व्यक्तिगत और बैंक डेटा सुरक्षित रह सके. अधिकृत सेंटर के अलावा अन्य लोगों द्वारा मोबाइल के माध्यम से लैपटॉप के माध्यम से गांव-गांव जाकर ई श्रमिक कार्ड बनाए गए तथा मन माना रुपया वसूला गया ई श्रमिक कार्ड बनवाने वाले लोग अपनी पात्रता को भूल गए तथा संपन्न और धनवान व्यक्ति और उनके घर के महिलाओं ने बढ़ चढ़कर ई श्रमिक कार्ड बनवाया जैसे पति कर्मचारी हैं और पीएफ ईपीएफ का भुगतान करते हैं या व्यापारी वर्ग जो जीएसटी रिटर्न करते हैं उसके बावजूद उनकी पत्नियों ने श्रमिक कार्ड बनवा लिया, संविदा कर्मचारी होने के बाद भी लोगों ने अपना संविदा कर्मचारी होना छुपा कर श्रमिक कार्ड बनवा लिया बड़े काश्तकारों द्वारा भी अपना और अपने परिवार जनों का ई श्रमिक कार्ड बनवाया गया. बेटा सरकारी जॉब करता है उनके माता-पिता उनके छोटे भाई बहनों द्वारा भी इस समय कार्ड सेवा का फायदा लिया गया किसी के यहां एक चौपाया वाहन है तो किसी के यहां 2 चौपाई पहिया किसी के परिवार में वाहन 2-3 मोटर – साइकिल या चौपाई वाहन और मोटरसाइकिल दोनों उपलब्ध होने के बाद भी श्रमिक कार्ड बनवाया गया, परिवार में शस्त्र लाइसेंस है या किसी व्यक्ति को अन्य स्रोत से मासिक पेंशन प्राप्त होने के बाद भी ई श्रमिक कार्ड परिवार जनों द्वारा बनवाया गया तो दूसरी तरफ राज्य सरकार द्वारा बिना जांच पड़ताल के ई श्रमिक कार्ड पर करोड़ों रुपए का बजट पास कर दिया कुछ ही दिनों में असली और नकली दोनों श्रमिकों के खाते नगद धनराशि आ आ जाएगी. असली मजदूर के हक का पैसा जैसे के राशन कार्ड में जनता के द्वारा किया गया धनवान और संपन्न व्यक्तियों द्वारा कोटे से लिया जा रहा निशुल्क खाद्यान्न वैसे ही ई श्रमिक कार्ड में होने वाला है भ्रष्टाचार. सरकार को चाहिए था कि ई श्रमिक कार्ड बनवाने के साथ-साथ एक घोषणापत्र भी श्रमिकों के द्वारा भरवा लेना चाहिए था कि यदि वह अपात्र श्रमिक पाय गए तो उनको दिया गया लाभ वापस सरकारी कोष में जमा करना पड़ेगा तथा वह कानूनी कार्रवाई के पात्र हो गए और इसके जिम्मेदार स्वयं होंगे. यह सरकार के द्वारा भूल हुई है और इसका खामियाजा सरकार को करोड़ों रुपए नुकसान देखा भुगतना पड़ेगा

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