राजनीतिक चरखे में उलझते घर खरीदारों के सपने।

नोएडा समाज जागरण,

यहाँ मै अजनबी हूँ जो हूँ बस वही हूँ। यह गाना तो आपने सुना ही होगा। यहाँ मैं अजनबी हूँ -२ मैं जो हूँ बस वही हूँ -२ यहाँ मैं अजनबी हूँ -२
कहाँ शाम-ओ-सहर थे कहाँ दिन-रात मेरे
बहुत रुसवा हुए हैं यहाँ जज़्बात मेरे
नई तहज़ीब है ये नया है ये ज़माना
मगर मैं आदमी हूँ वही सदियों पुराना
मैं क्या जानूँ ये बातें ज़रा इन्साफ़ करना
मेरी ग़ुस्ताख़ियों को ख़ुदारा माफ़ करना
यहाँ मैं अजनबी
यह गाना फिल्म जब जब फूल खिले, मोहम्मद रफी के स्वर में आज भी बहुत कुछ कहने के लिए तैयार है। यहाँ मै कोई इस गाने की तारीफ या शिकायत नही कर रहा हूँ, बल्कि इस गाना के साथ नोएडा के घर खरीदारों के परिस्थितियो का तुलना कर रहा हूँ।

क्योंकि यहाँ भी लाखों घर खरीदार अजनबी है, और अपने जीवन भर के जमा पूंजी बिल्डर को देने के बाद भी मारे मारे भटक रहे है। किसी को घर नही मिला है तो किसी का रजिस्ट्री नही। जिसकों घर भी मिल गया और रजिस्ट्री भी हो चुका है वो बिल्डर के मैनेजमेंट से परेशान है। करोड़ो-करोड़ों के अपार्टमेंट लेकर लोग दहशत में जिंदगी गुजारने को मजबूर है क्योंकि यहाँ वह अजनबी है।
सबकुछ गांधी जी के चरखे की तरह है जिससे आजादी मिली यह तो नही पता लेकिन पूरे हिन्दुस्तान उलझ जरूर गया। सारे नेता गांधीवादी हो गये है और सत्य अहिंसा और परमोधरम में उनका कोई विश्वास नही। धन रक्षति तथैव च में विश्वास रखते है। राजनीतिक के विकराल रूप स्कूल से लेकर सेक्टर गाँव और सोसायटी मे भी अपना पकड़ बना लिया है। हर बात के लिए चुनाव होना आवश्यक हो गया है। लोग एक दूसरे के परस्पर विरोधी।

लाखों घर खरीदार अपने हक के लिए परेशान है। हजारों रेजिंडेंट वेलफेयर एसोसिएशन बिल्डर और राजनीतिक पर मेहरबान है। पिछले दिनों एक मौलिक जन संवाद नाम से कार्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें मौलिक भारत संस्था के द्वारा घर खरीदार के संगठन को आमंत्रित किया गया। बहुत सारे तो राजनीतिक कारण से पहले ही नही आए, जो मेहरबान आये भी वह भी राजनीतिक चरखे में उलझकर रह गए। घर खरीदारों के समाधान के लिए एक साथ मजबूत कदम उठाने का निश्चय किया गया लेकिन ड्राफ्ट तैयार होने से पहले गांठ पड़ने लगा। क्योंकि राजनीतिक महत्वाकांक्षा जो बीच में खड़ा मिला। वोट किसकों देना है नही देना है वह आपका अपना अधिकार है आप स्वयं सुनिश्चित करते है लेकिन अपने राजनीतिक महत्वाकांक्षा में पड़कर लाखो अजनबी घर खरीदारों के साथ आप न्याय कैसे कर सकते है ? हर कोई किसी न किसी राजनीतिक पार्टी से जुड़ा है, इसका यह मतलब नही कि घर खरीदार के हितों की बात न करे। लेकिन राजनीतिक इतनी गहरी खाई खोद चुकी है भ्रष्टाचार की उससे निकलना संभव ही नही लगता है। भले ही हम जनता के प्रतिनिधि है, घर खरीदार के प्रतिनिधि है लेकिन बिल्डर और राजनीतिक के सांठगांठ में लोग स्वयं का हित ही देख रहे है।

नोएडा सेक्टर 75 का एक नया मामला सामने आया है जहाँ पर बिल्डर युनियन बैंक आफ इंडिया से उस प्लाट पर लोन लिया हुआ है जहाँ पर पहले से ही लोन घर खरीदारों नें लिया हुआ है। आखिर यह सब हुआ कैसे ? एनओसी किसने दी है इसके लिए ? जिस प्लाट पर पहले से लोन चल रहा हो उस पर दुबारा लोन बैंक नें कैसे पास कर दिया ? जिस प्रापर्टी के जमीन के 90 करोड़ प्राधिकरण को नही दिया गया, 11 साल गुजर जाने के बाद भी प्रोजेक्ट पूरा नही किया गया उस पर दुबारो लोन हो गया कैसे। बिल्डर नें 250 करोड़ से ज्यादा पैसे घर खरीदारों से जमा किया, 71 करोड़ की लोन बैंक से ले लिया और 90 करोड़ प्राधिकरण को भी नही दिया। सबसे बड़ी बात आज भी वहाँ के लोग मूलभूत सुविधाओ के लिए तरस रहे है, प्रोजेक्ट कंपलीट नही किया गया है, अगर कंपलीट किया जाता है तो 15-20 करोड़ की खर्च और भी होने का अनुमान है।

मामला नोएडा सेक्टर 75 एम्स गार्डेनिया प्लाट नंबर 9 की है जहाँ पर युनियन बैंक आफ इंडिया नें गेट के बाहर नोटिस चिपका दिया है और अपने आपको मालिक बताया है। खैर मालिक कोई भी हो लेकिन घर खरीदारों नें युनियन बैंक से पहले ही बिल्डरों को पैसे दे रखा है वह भी बैंक के द्वारा लोन लेकर। पहला हक घर खरीदार का है न कि बैक का। खैर इस अजनबी शहर में अजनबियों के लिए कौन आवाज उठाए। घर खरीदारों के लिए चलने वाले सभी आंदोलन राजनीतिक रूप लेकर विलुप्त होने के कगार पर है। नेफोमा के अन्नु खान कहते है कि हमने सबसे बड़ी भूल कि है कि नोएडा ग्रेटर नोएडा में अपने लिए एक मकान का सपना देखा और बिल्डर को पैसा दे दिया।

ट्रांसफर चार्ज आधा करके अपने ही पीठ थप-थपाने वाले योगी सरकार यह भी बताए कि इसका फायदा क्या होगा और किसे होगा ? जब किसी को घर नही मिलेगा तो रजिस्ट्री कैसे करवा ले। जहाँ पोजिशन दे दिया गया है वहाँ पर बिल्डर के ऊपर प्राधिकरण के सैकड़ो करोड़ बकाया है। जब तक बिल्डर प्राधिकरण को पैसे नही देते है तब तक रजिस्ट्री नही किये जायेंगे। बिल्डर पैसे देंगे क्यों जब कोई उससे लेना ही नही चाहे ? राजनीतिक चुप्पी के बाद भी जनता उसके साथ-साथ है। भारतीय जनता पार्टी सरकार में है इसलिए कुछ नही बोलती है और दुसरे पार्टी नोएडा ग्रेटर नोएडा के भ्रष्ट्राचार में शामिल है इसलिए चुप है। मजबूरी दोनों तरफ है। खैर भारत के न्यायप्रिय राजनीतिक के भ्रष्ट्राचार रूपी चेहरो को हजारों सलाम। लानत को उनकों है जो इन पर बार-बार विश्वास कर लेते है। स्कूटी देने के वादे करने वाली मोहतरमा पहले लाखों घर खरीदारों को उनके हक दिलाने के लिए बात करती तो कितना अच्छा होता ? लेकिन यहाँ वोट कम है क्योंकि यहाँ हम अजनबी है।

खैर आप इस गाने को पढिये

मुझे भी है शिकायत तुझे भी तो गिला है
यही शिक़वे हमारी मोहब्बत का सिला हैं
कभी मग़रिब से मशरिक़ मिला है जो मिलेगा
जहाँ का फूल है जो वहीं पे वो खिलेगा
तेरे ऊँचे महल में नहीं मेरा गुज़ारा
मुझे याद आ रहा है वो छोटा सा शिकारा
यहाँ मैं अजनबी …

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