हमारे घर महिलाऐ कैन्सर और अन्य क्रोनिक बीमारियों के अधिक तर जिम्मेदार होतीं हैं तो चौंकिये नहीं । उसके कुछ तथ्य इस प्रकार हैं-

चौकिये मत?
हमारे घर महिलाऐ कैन्सर और अन्य क्रोनिक बीमारियों के अधिक तर जिम्मेदार होतीं हैं तो चौंकिये नहीं । उसके कुछ तथ्य इस प्रकार हैं-
1-      सब्जी खरीदने जातीं हैं तो बिना कीडे लगीं और चमकदार सब्जियां खरीदती हैं । चूंकि बाजार हमेशा ग्राहक के अनुसार चलता है अतः सब्जी विक्रेताओ और किसानों ने खूब कीटनाशक दवाओं और तरह-तरह के रसायन से सब्जियों में लगाकर बेचना शुरू कर दिया ।
 
2-      पहले अनाज और दालों मे सुरसूरी लगतीं थी तो सूखा कर या अधिक से अधिक नीम पत्ती या टाइट बर्तन में रखकर प्रयोग कर लिया करते थे। वैसे मुर्गा,  भैंसा और अण्डा तो खा जायेंगे परन्तु यदि सुरसूरी लगी दाल आटा नहीं खा सकते हैं और जहर लगा आटा ब्रांड से खाते हैं जिस रोगों से लडने वाला चोकर निकाल दिया जाता हैं । और उसमें प्रजेटिव मिलाकर बेचा जाता है । उसे शौक से खाते हैं ।
3-      पहले हम किसान से सीधे खरीदते थे अब हम ब्रांड से खरीदते हैं । किसान के यहाँ  मिलावट की सम्भावना कम होती है । परन्तु ब्रांड preservative मिलाकर चमक दार बेचते हैं । इससे किसानों को उचित दाम नहीं मिलतें हैं ।
 
4-      अक्सर आप देख रहे हैं कि जितने ब्रांडेड उत्पाद होते हैं उनमें किसी प्रकार का कीड़ा या अन्य खरपतवार के बीज नहीं होते हैं इसका मतलब उनके द्वारा कीटनाशक और प्रिजर्वेटिव रसायन और छलना लगाकर साफ कर  के प्रयोग किया जाता है जिससे लोगों में कैंसर,  किडनी फैलियोर और अन्य भयंकर बीमारियां होने  लगी। हम जिनको खरपतवार कहते हैं वास्तव में वह भी हमारे जीवन में आर्वैदिक दवाओं का स्थान लिए हैं पहले किसान की अनाज में इनका मिश्रण रहता था जाने अनजाने उसे हम खा लेते थे जिससे हमारा स्वागत काफी हद तक ठीक रहता नहीं था मेरा मानना है जहां पर जिस रोग की संभावना उससे संबंधित औषधि खरपतवार के रूप में आसपास मिलती है। आजकल स्वामी रामदेव द्वारा रोज टीवी पर ऐसे ही खरपतवारो  का जिक्र किया जाता है जिससे किडनी, प्रसव, कैंसर आदि की रोकथाम होती है।
 
5-      क्या कभी सुना है आपने मां अपने बच्चों को धीमा जहर दे रही है हां यह सच है आज कल हम बच्चों को देखते हैं कि टॉफी,  चॉकलेट, चाउमीन, फास्ट फूड, ब्रेड, अंकल चिप्स और परांठे  आज सिंथेटिक चीजें शुरू से बड़े लाड से खिला रहे हैं जिसका नतीजा होता है कि बच्चे शुरू से ही पेट की अन्य भयंकर  बीमारियों से ग्रसित हो जाते हैं। पहले लोगों पर पैसा नहीं होता था जिसके कारण बच्चा दूध, मक्खन, मट्ठा, दही और देसी फल आदि खाने को मिलते थे जिससे वह स्वस्थ रहते थे। आज हम दूध और सब्जी और अन्य शुद्ध चीज के भाव पूछते हैं परन्तु कोल्ड ड्रिंक , चॉकलेट, अंकल चिप्स जैसे धीमें जहर का भाव नहीं पूछते।
 
6-   आज हमारे बच्चे रोज सुबह 9-10 बजे उठते हैं और हमारी नई पीढ़ी के जवान  भी 9-10 बजे उठते हैं । और अपने को बहुत पढ़ा लिखा मानते  हैं। जिसके कारण वह जवानी में ही है बुढ़ापे का मजा लेते हैं। सबसे बडा सुख स्वस्थ शरीर हैं । यदि शरीर स्वस्थ होगा । तब आप पैसे का सदुपयोग कर पाएंगे।
 
7-       “रोज सवेरे तीसरे पहर दौलत लूटती फिरती है। जो सोता है तो खोता है। जो जागता है सो पाता है।“
 
आज हम किसान से सीधे खरीदने में शर्म  महसूस करते हैं परंतु वही उत्पाद चार गुना दर पर कंपनी के माध्यम से मिलता है तो हम बड़े गौर से कहते हैं हमने फलाने  ब्रांड का खाया । सोचो किसानों की दुर्दशा का कारण मत बनो। सीधे किसान से खरीदो।
 
यदि सत्य बुरा लगा हो तो छमा करियेगा ।

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