स्वामी प्रसाद मौर्य के सपा मे आने से कइयो को हाथ धोना पड़ सकता है अपनी दावेदारी से |



विश्वनाथ त्रिपाठी
प्रतापगढ़
जब से स्वामी प्रसाद मौर्य भाजपा छोड़ कर सपा मे आए तभी से कइयो के सिर का दर्द बढ़ गया है | अब उन्हे अपने कैरियर की चिंता सताने लगी है | इस कद्दावर दल बदलू के आगे बहुतों की निष्ठा पर आच आने वाली है जो अब रात दिन बेचैनी का अनुभव करने लगे है | अब इनके मार्ग अवरुद्ध होने पर ए किस खेमे के वफादार सिपाही होगे किसी चुनौती से कम नहीं हो सकता | राजनीति का आधार ही बदल जाने की संभावना से अपना पत्ता कटने का भय सताने लगा है |



*कइयों का कट सकता है पत्ता*
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की सियासी तपिश के बीच पूर्व मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य ने बीजेपी छोड़कर सपा की साइकिल पर सवार हो गए हैं. स्वामी प्रसाद के साथ तमाम विधायक और पूर्व विधायक ने भी सपा की सदस्यता ग्रहण कर ली है. स्वामी के आने से भले ही सूबे की कई सीटों पर सपा को सियासी फायदे की उम्मीद दिख रही हो, पर कई सीटों पर सियासी समीकरण बिगड़ गए हैं. सपा के कई मौजूदा विधायकों की सीटों पर संकट गहरा गया है तो कई सीटों पर चुनाव लड़ने की आस लगाए नेताओं को अरमानों पर पानी फिरता नजर आ रहा है.
*ऊंचाहार सीट पर मनोज पांडेय की चिंता*
स्वामी प्रसाद मौर्य के सपा में आने से सीधे तौर पर पार्टी के दो मौजूदा विधायकों के लिए सबसे ज्यादा चिंता बढ़ गई है. इसमें पहली सीट रायबरेली जिले की ऊंचाहार है, जहां से सपा के दोबार के विधायक मनोज पांडे है. मनोज पांडे ऊंचाहार सीट से तीसरी बार चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं, लेकिन इसी सीट से स्वामी प्रसाद के बेटे उत्कृष्ट मौर्य (अशोक) भी दावेदार हैं. स्वामी के सियासी कद को देखते हुए मनोज पांडे के लिए मुश्किलें खड़ी हो गई है कि ऊंचाहार सीट से सपा उत्कृष्ट मौर्य को कैंडिडेट न बना दे.
*जलालाबाद सीट पर शरद वीर सिंह*
वहीं, शाहजहांपुर जिले की जलालाबाद विधानसभा सीट पर भी सपा विधायक शरद वीर सिंह के सामने भी संकट गहरा गया है. स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ जलालाबाद के पूर्व विधायक नीरज मौर्य ने भी सपा का दामन थाम लिया है. ऐसे में जलालाबाद सीट पर सपा प्रत्याशी को लेकर सस्पेंस गहरा गया है. तीन बार के विधायक शरद वीर सिंह लखनऊ गए, लेकिन अखिलेश यादव से मुलाकात नहीं हो सकी. अनिल मौर्य 2012 में बसपा से विधायक रहे हैं और बाद में उन्होंने बीजेपी का दामन थाम लिया और सपा में आए गए हैं.
*बिधूना सीट पर नवल किशोर की चिंता*
औरैया जिले की बिधूना विधानसभा सीट से बीजेपी विधायक विनय शाक्य ने स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ सपा का दामन थाम लिया है, जिसे बिधूना सीट पर चुनाव लड़ने की उम्मीद लगाए बैठे डॉ. नवल किशोर की मुश्किलें खड़ी हो गई है. दिलचस्प बात यह है कि नवल किशोर सपा में शामिल होने वाले स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी व बदायूं से सांसद संघमित्रा मौर्य के पति रह चुके हैं. हालांकि, 2021 में दोनों की बीच तलाक हो चुका है, जिसके बाद किसी तरह का कोई नाता नहीं है.

स्वामी प्रसाद मौर्य ने 2016 में जब बसपा छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए थे तो उसी के बाद डॉ. नवल किशोर ने सपा की सदस्यता ले रखी थी. नवल किशोर बिधूना सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन स्वामी प्रसाद मौर्य के साथ सपा में एंट्री करने वाले विधायक विनय शाक्य के भाई देवेश शाक्य के चुनाव लड़ने की संभावना है. ऐसे में डा. नवल किशोर का टिकट मिलना मुश्किल हो गा |





वहीं, स्वामी प्रसाद मौर्य के भतीजा प्रमोद मौर्य काफी पहले से सपा में है. प्रमोद मौर्य प्रतापगढ़ जिला पंचायत अध्यक्ष रह चुके हैं और सपा के टिकट पर इस बार चुनाव लड़ने की तैयारी में है. रायबरेली की सदर और जौनपुर सदर सीट से दावेदारी भी कर रखी है, लेकिन अब स्वआमी प्रसाद मौर्य के आने के उनके चुनाव लड़ने की संकट गहरा गया है. ऐसे ही सूबे की तमाम सीटों पर पेंच फंस गया है.

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