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प्रकृति का चक्र

प्रकृति का चक्र
एक बार कि बात है- पर्शिया रज्य के नागरिक बहुत परेशान हो गए। झुंड के झुंड पक्षी आते और उनके खेत-खलिहानों का अनाज चट कर जाते। इससे उन्हें बहुत नुकसान होने लगा। परेशान नागरिक अपला दुखड़ा लेकर राजा फ्रेडरिक के पास पहुंचे। यह सब सुनकर राजा फ्रेडरिक को बड़ा क्रोध आया। उसने तत्काल घोषणा करवा दी कि राज्य के सारे पक्षियों को मार दिया जाए। जो लोग पक्षियों को मारेंगे, उन्हें पुरस्कृत किया जएगा।
फिर क्या क्था? कुछ लोगों ने परेशानी और कुछ लोगों ने इनाम के लालच में पक्षियों को मारना शुरू कर दिया। यह एक राष्ट्रीय अभियान बन गया। धीरे-धीरे राज्य के सारे पक्षी समाप्त हो गए। ऐसे में लोगों ने चैन की सांस ली। राज्य में उत्सव मनाया गया। राजा फ्रेडरिक ने कहा,” चलो, यह समस्या सदा के लिए समाप्त हो गई। अब अनाज का नुकसान नहीं होगा।“
लेकिन अगले वर्ष जब लोगों ने खेतों में अनाज बोया तो एक दाना भी नहीं उगा। इसका कारण यह था कि मिट्टी में जो कीड़े थे, उन्होंने बीजों को ही खा लिया था। पहले ऐसे कीड़ों को पक्षी खा जाते थे और फसल की रक्षा करते थे। लेकिन इस बार राज्य में कोई पक्षी बचा ही नहीं था जो इन कीड़ों मे फसल को बचाता। फसल पैदा न होने से पूरे राज्य में त्राहि-त्राहि मच गई। पहले तो लोगों की समझ में नहीं आया कि आखिर ऐसा क्यों हुआ? लेकिन जब उन्हें सही बात का पता चला तो वे अपनी गलती पर बहुत पछताने लगे।
एक बार फिर सब राजा फ्रेडरिक के पास पहुंचे। सर्वसम्मति से तय हुआ कि दूसरे राज्यों से पक्षी मंगवाए जाएं। बड़ी संख्या में पक्षियों के आने के बाद स्थिति संभली। इस घटना से लोगों ने समझा कि सभी जीव इस सृष्टि में एक-दूसरे पर निर्भर हैं। किसी भी चीज को कम करना प्रकृति का चक्र तोड़ना होगा।इस पृथ्वी पर जो कुछ भी है, वह बेकार नहीं है और कहीं न कहीं एक चक्र से जुड़ा है। उसे नष्ट करने का प्रयत्न हमारे लिए अत्यंत घातक हो सकता है।

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