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हास्य कविता

हास्य कविता

इस सीजन में ठंड बहुत है ,
मेरे भाई नहाना ना ।।
मेरे भाई नहाना ना ।।
चाहे दिवाली या हो दशहरा
या फिर होली तीज हो ।
या हो क्रिसमस या बैसाखी
या नवरात्रि ईद हो ।।
घरवाली कितना भी डांटे
पर अपना सर हिलाना ना
इस सीजन में ठंड बहुत है मेरे भाई नहाना ना ।।।।
मेरी बातें गर तुम सबको
अच्छी ना लगती हो कहना
यह ठंडी जब तक ना बीते
बिना नहाए ही रहना
बच्चे तो होते हैं सच्चे
उनको तुम नहलाना ना
इस सीजन में ठंड बहुत है मेरे भाई नहाना ना ।।।।
गर शरीर से आए बदबू
पाउडर सेंट लगा लेना
गर घर पर यह खत्म हो जाए
ऑनलाइन मंगा लेना
घर पर रहना घर पर खाना
कहीं घूमने जाना ना
इस सीजन में ठंड बहुत है मेरे भाई नहाना ना ।

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