गांधी जयंति पर स्वच्छता अभियान, सरकार और एनजीओ

जनता के ताली बटोरने के बजाय अच्छा तो तब होता जब सरकार प्लास्टिक्स बनाने वाली कंपनी को बंद करती। लेकिन सरकार को इनसे मोटा टैक्स लेती है और मरने और मारने के लिए जनता को छोड़ देती है। स्वच्छ भारत अभियान पर सरकार नें जनता से लाखों करोड़ रुपये शेष लगाकर वसूली किया। उस पैसे को एनजीओं और समाजिक संस्थाओं में बंदरबांट कर दिया जो अप्रत्यक्ष रूप से सरकार के लिए प्रचार प्रसार के काम करती है।

जब शहर की सफाई उन्ही कर्मचारियों को करना था जो पहले से करते आ रहे है तो क्यों नही उस पैसे से लाख दो लाख कर्मचारी ही भर्ती कर लिया गया। सेल्फी का दौर तो आपने और हमने देखा ही था किस प्रकार से एक जूलुस निकाला जाता और फिर नेता जी और समाजिक संस्था के लोग सेल्फी लेकर सोशल मिडिया पर वायरल करते थे। जहाँ सफाई करने जाते वहाँ और गंदगी फैलाकर ही चले आते। फिर उन्ही सफाई कर्मचारियों से उनका सफाई करवाये जाते थे। सबकुछ तो पूराना ही था सिर्फ एक नया था तो वह था आम जनता से वसूले जाने वाले शेष। मै ऐसा भी नही कह रहा हूँ कि भारत स्वच्छ नही हुआ है। निश्चित तौर पर भारत स्वच्छ हुआ है लेकिन उम्मीद के किसी पैरामीटर पर खड़े नही उतरने वाले स्वच्छ।

नोएडा में ही ले लिजिए गंगा नमामि के तहत सरकार हजारों करोड़ की फंड खर्च कर रही है लेकिन गंगा नमामि के अन्तर्गत आने वाली यमुना नदी और यमुना के सहायक नदी हिंडन की हालत देखकर आपको पता लग जायेगा की गंगा नमामि परियोजना किस गति से चल रहे होंगे। हिंडन की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि वैज्ञानिकों नें उसे मृत घोषित कर दिया है। खैर कल गांधी जयंति है निश्चित तौर पर कल फिर से प्रधानमंत्री जी देश को लोगों को संदेश देंगे की प्लास्टिक्स पर्यावरण के लिए कितना खतरनाक है। इससे मानव जाति को कितना खतरा हो सकता है।

सिंगल युज प्लास्टिक्स का इस्तेमाल बंद करने के लिए आम जनता से आग्रह करेंगे। हर बार की तरह बाजारों में सड़को पर कुछ पटरी दुकानदार और बडे दुकानदारों का भी चालान किया जायेगा जिसकी तस्वीर और खबर अखबार में छपने के लिए दिए जायेंगे। सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर हम सब जानते हुए कि प्लास्टिक्स का मूल कारण क्या है उस चर्चा क्यों नही करते है ? क्या छोटे-छोटे दुकानदारों का चालान कर देना इस समस्या का हल है। अगर होता तो आज तक हो गया होता।

इस समस्या का मात्र एक हल है प्लास्टिक्स उत्पादन करने वाली कंपनी को बंद कर देना , जब उत्पादन ही नही होगा तो बाजार में पहुँचेगा कहाँ से ? हम सब जानते है कि प्लास्टिक्स बनाने वाले मशीनरी काफी हैवी होते है और यह बिना सरकार के अनुमति के नही चलाये जाते है। सरकार से इसके लिए लाईसेंस लिए जाते है। एक तरफ सरकार लाईसेंस दे रही है दूसरी तरफ जनता से अपेक्षा रखती है कि जनता प्लास्टिक्स का प्रयोग न करे। क्या यह अच्छा नही होता कि क्लीन ड्राईव चलाने वाले स्वयंसेवी संस्था सरकार पर दबाव बनाती की वह प्लास्टिक्स उत्पादन पर प्रतिंबध लगाये।

जब थैली में दुध मिलेंगे तो भला कौन डब्बा लेकर बाजार जाना पसंद करेगा। अगर सरकार चाहती है कि डब्बा लेकर लोग जाय और डब्बे में दुग्ध भरकर लेकर आये तो पहले सरकार को प्लास्टिक्स बंद करना होगा। नोएडा सेक्टर 29 प्रेस क्लब में एनजीओं के द्वारा प्रेस कांफ्रेस किया गया और बताया गया कि क्लीन ड्राइव और जागरूकता अभियान चलाया जायेगा जिसके लिए 2 अक्टूबर से 4 अक्टूबर का समय निर्धारित किये गये है। आपको जरूर सुननी चाहिए।

Please follow and like us:
%d bloggers like this: