उगते सूर्य को अर्घ्‍य देने के साथ ही चैती छठ संपन्‍न

रजौली मुख्यालय में लोक आस्था का महापर्व छठ भगवान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ ही संपन्न हो गया।शुक्रवार को चौथा और अंतिम दिन था।शुक्रवार सुबह करीब 05 बजकर 47 मिनट पर सूर्योदय होने के साथ ही अर्घ्यदान का क्रम आरंभ हो गया था।इसके बाद व्रती व उनके स्वजनों ने भगवान भास्कर को अर्घ्य देकर खुद के लिए और समाज व देश के हित की कामना की।
पिछले दो सालों से चैती छठ कोरोना से प्रभावित

कोरोना संक्रमण की वजह से पिछले दो सालों से चैती छठ के अवसर पर छठ घाट पर कम संख्या में श्रद्धालु पहुंच पा रहे थे। लेकिन इस बार संक्रमण के कम होने पर प्रशासन की ओर से छठ घाटों पर पूजा को लेकर विशेष इंतजाम दिखे।छठ घाटों पर श्रद्धालुओं की काफी भीड़ दिखी।

धनार्यज नदी छठ घाटों पर उमड़ी भीड़

चैती छठ पर गुरुवार को अस्ताचलगामी और उदीयमान भगवान सूर्य को विभिन्न छठ घाटों,अस्थायी तालाबों और घर की छतों पर पानी में खड़े होकर व्रतियों ने अर्घ दिया और परिवार के मंगल,सुख-समृद्धि व पुत्र के दीर्घायु होने की कामना की।शुक्रवार सुबह उदीयमान सूर्य को अर्घ देने के बाद पारण के साथ महापर्व का चार दिवसीय अनुष्ठान पूरा हुआ।

नहाय-खाय से की गई छठ मानने की शुरुआत

घनश्याम पांडेय ने बताया कि पांच अप्रैल को नहाय-खाय से इसकी शुरुआत की गई।छठ व्रत की ही तरह इसे भी मनाया गया। नहाय-खाय में सुबह उठकर पूजा की गई।छः अप्रैल को खरना मनाया गया।उस दिन रोटी,खीर, केला चढ़ाकर छठी मैया की पूजा की गई।गुरुवार को तालाब,नदी में डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया गया।मंदिर जाकर महिलाओं ने पूजा की।इसके साथ ही भगवान शिव को भी जल चढ़ाया गया।

मनोकामना पूरी होने पर की महिलाओं ने की पूजा

महिलाओं ने बताया कि नवरात्रि की षष्ठी तिथि पर छठी मैया कात्यायनी की पूजा की गई।ये पूजा और छठ व्रत की पूजा दोनों ही समान है।उन्होंने बताया कि इस पूजा को उन्होंने अपनी मनोकामना पूरी होने पर की। उन्होंने अपने आस्था के अनुसार पूजा की।बड़े स्तर पर छठी मैया के पूजन की एक विशेष तिथि है, जब उत्तर भारत में इसे बड़े पैमाने पर मनाया जाता है।मन्नत पूरी होने पर ही षष्ठी पर पूजा की गई।

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