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अलविदा हरिपाल त्‍यागी! शब्‍दों और रंगों के इस जादूगर के बिना फीकी रहेगी कला की दुनिया

अलविदा हरिपाल त्‍यागी! शब्‍दों और रंगों के इस जादूगर के बिना फीकी रहेगी कला की दुनिया

महान कवि हरिवंशराय बच्चन की कविताओं को पढ़कर ही महसूस किया जा सकता है, यह अब तक का सबसे बड़ा भ्रम है. ऐसा इसलिए भी है क्योंकि एक कलाकार ने बच्चन के काव्य संग्रह के इतने खूबसूरत चित्र बनाए कि उन्हें देखकर ही आप बच्चन की सार्थकता को महसूस करने लगेंगे. बच्चन की कविताओं को रेखाओं का सहारा देने वाले इस कलाकार का नाम हरिपाल त्यागी था. उन्हें जनता का कलाकार भी कहा जाता है. हरिपाल त्यागी को याद करने की हजारों वजह हैं लेकिन ताजा वजह ये है कि 1 मई यानी बुधवार को उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया. वह 85 साल के थे और ब्लड कैंसर से लड़ रहे थे. त्यागी का जन्म 20 अप्रैल 1934 को महुवा, बिजनौर में हुआ था. इंटर पास करने के बाद वह दिल्ली चले आए थे और यहां उन्हें पहली बार चित्रकारी और कविताएं लिखने का शौक चढ़ा.

हरिपाल एक अखबार में बतौर कार्टूनिस्ट काम करते थे. बाद में उन्होंन कई शहरों में अपनी चित्रकारी की प्रदर्शनी लगाई. प्रसिद्ध अभिनेता अमिताभ बच्चन के पिता हरिवंशराय बच्चन की किताबों के चित्र हरिपाल ही बनाते थे. एक इंटरव्यू के दौरान हरिपाल ने ही इस बात का खुलासा किया था कि बच्चन की किताबों के स्केच और कवर वही बनाते थे.

हरिपाल ने इससे जुड़ा एक वाकया भी साझा किया था. उन्होंने बताया था कि एक बार जब वह बच्चन से मिलने उनके दिल्ली स्थित घर गए तो बच्चन ने कहा कि जिसने उनकी किताब नहीं पढ़ी, वह उनके चित्र कैसे बना सकता है. बच्चन के ऐसा कहने पर हरिपाल ने उन्हें टोका और उनकी किताबों के बारे में वहीं बताने लगे. जिसके बाद से बच्चन की कविताओं के चित्र बनाने की जिम्मेदारी हरिपाल को मिल गई.

हरिपाल कहते थे कि उनकी जिंदगी में पैसे की कभी कमी नहीं हुई और उन्होंने खूब पैसा लुटाया लेकिन वह साधारण तरीके से जीते थे. वह कहते थे कि उन्हें बेईमान इंसान पसंद है, लेकिन वह पारदर्शी होना चाहिए. इसके अलावा वह अक्सर किताबी ज्ञान की बजाय अपना नजरिया बदलने को कहते थे.

हरिपाल में कई हुनर थे. वह कवि, लेखक, चित्रकार, कथाकार, कला समीक्षक और व्यंग्यकार थे. हालांकि उनके रहन-सहन में ग्रामीण परिवेश की झलक मिलती थी क्योंकि वह हमेशा जमीन से जुड़कर रहना पसंद करते थे. पढ़ाई के बाद उन्हें जब खाली समय मिलता था तो वह तस्वीरें बनाया करते थे.

व्यंग्य लिखने के मामले में हरिपाल का कोई तोड़ नहीं था. उनका व्यंग्य ‘आदमी से आदमी’ तक खूब प्रसिद्ध हुआ था. साहित्यिक जगत की किताबों पर बने चित्रों के लिए अक्सर हरिपाल की चर्चा होती थी. हरिपाल का जाना साहित्यिक जगत के लिए एक बड़ी क्षति है. अलविदा हरिपाल त्यागी!

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