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टूटी हुई छत

आमिर गाँव का जाना पहचाना नाम था उस शख्श का रुतबा गाँव में दूर दूर तक चर्चा में था । आमिर एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर था जो कि काफी दूर अपने निवास स्थान से अपने ऑफिस का सफर तय करता था । उसका रूटीन कुछ अलग नहीं किन्तु इतना जरूर था कि वहअपने परिवार में सबसे पहले उठता था आजान पढता और नियमित कार्यो को सहज गति से करते हुए गुजर बसर कर रहा था । कुछ समय पश्चात् घर में लड़की की शादी पड़ी । अब आमिर के पास जोड़ तोड़ करके जितने पैसे थे वो रीना के दहेज़ में चला गया और पैसों की तंगी इस कदर बढ़ गई कि परिवार का खर्च और कर्ज चुकाने का टेंशन दिन पर दिन बढ़ता गया ।
आमिर खुदा को याद करता , और मन ही मन अपने दुःख को दबाए जीने को विवश था । उसका एक लड़का था जो माँ के गुजरने के बाद और अब्बू के ऑफिस जाने के बाद निकम्मों की तरह समय व्यतीत करता था , आमिर को लगता था बेटा स्कूल जाकर पढ़ाई करता है । और घर में एक बेटी थी वो भी अब ससुराल चली गई है । घर कौन संभाले? आमिर की फ़िक्र बढ़ती ही जा रही थी , किसी तरह एक अच्छी बहू आ जाये और उसके निकम्मे बेटे खालिद को संभाल ले और घर की जिम्मेदारियों को निभाना जल्दी सीख जाये । किन्तु खालिद तो ठहरा निकम्मा ,नालायक और पिता आने अब्बू के दिए पैसों का शराब पी जाया करता था । आमिर बहुत परेशान था उसकी आदतों से । वहीं साहूकार अपने पैसे मांगने आता है । घर पर कोई नहीं था । वह वापस चला गया । आमिर रात को थका हारा घर पहुँचता है जैसे ही पानी पीने के लिए गिलास उठाता है । बाहर एक पडोसी की आवाज आती है ” आमिर भाई जान”! कौन? आमिर बाहर निकलता है । देखता है कि कोई पडोसी है ,’ ‘आमिर ‘क्या बात है जनाब आज कैसे हमारे दरवाजे पर पधारे हैं आप?आइये ,भीतर आइये! अंसारी कहता नहीं भाई जान आप थके हुए ऑफिस से आये हैं थोड़ा आराम कर लीजिए मैं तो बस ये कहने आया था कि सुबह जब आप ऑफिस च्चल गये थे तो साहूकार आया था । कहकर गया है उसके उधर पैसे जल्द चुकाने को । आमिर ने अंसारी को कहा; ठीक है भाई मैं साहूकार से कल मिलकर आऊंगा ।
आमिर ने अगले सुबह अपने पास कुछ संचित पैसों से साहूकार के कुछ उधारी के पैसे चुका दिए । चिंता थोड़ी कम हुई कि दूसरी तरफ खालिद के शराब और जुए के पैसों की फरमाइश। आमिर ने गुस्से में खालिद को डांटा और बोला ‘ख़बरदार जो दुबारा पैसा माँगा ‘ !अब मैं देखता हूँ तू कैसे शराब पीता है । आमिर की हालात बद् से बदतर होती गयी । बहुत साल यूँ ही गुजर गए उसके मकान की मरम्मत जो अधूरी पड़ी थी । कमरे में छत का पानी भर जाता था और छत की जर्जर हालत ऐसी थी कि घर टूटकर कब बिखर जाये कोई नहीं सोच सकता । वस्तुतः आमिर ने सोचा था कि खालिद कुछ अच्छा बिज़नस कर लेगा और अपने पैरों पर खड़ा हो जायेगा तो मैं सब ठीक ठाक करके उसका निकाह करा दूंगा । परंतु ठीक इसके विपरीत जो हुआ आमिर ने इसकी कल्पना भी नहीं की थी ।
खालिद घर नहीं लौटा ! कहाँ रह गया? रात के 11 बज गए हैं ! आमिर के मन में बुरे ख्यालात आने लगे ।
उसे हर वक्त खालिद की चिंता सताती रहती थी । क्या करे !कहाँ ढूंढे? परेशां बैठा पूरी रात निकल गई । सुबह सुचना आई कि खालिद की एक्सीडेंट में मौत हो गई । आमिर इस असहज स्थिति में खुद को संभाल नहीं पाया । और हृदयघात होने से आमिर की भी मौत हो गई ।
उस जर्जर मकान की तरह एक हँसते खेलते परिवार की जिंदगी बिखर गई।
गायत्री शर्मा

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