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मलेरिया के लिये रक्त- परीक्षण (Blood Examination for M.P.)

मलेरिया के लिये रक्त- परीक्षण
(Blood Examination for M.P.)
मलेरिया परजीवी (Malareal Parasite M.P.) का अर्थ मलेरिया पैरासाइट के रोग जीवाणुओं की उपस्थिति का रक्त में निरीक्षण किया जा सकता है जो ऐसे रोगी के निदान की पुष्टि के लिये करना आवश्यक हो जाता है जिसको ज्वर मे पहले सर्दी या कँपकँपी का कष्टकर आभास होता है। ज्वर में शरीर का तापमान उच्चतम बिन्दु तक पहुँच कर पुन: सामान्य स्थिति में आजाये और कुछ समय पश्चात पुन: ज्वर का आक्रमण हो जाये तो ऐसे रोगी के रक्त की परीक्षण करके यह पुष्टि की जाती है कि वह मलेरिया से प्रभावित है या नहीं।
मलेरिया के लिये य रक्त परीक्षा चिकित्सा से पहले ही कर लेनी चाहिये जिससे मलेरिया के रोगाणुओं को स्पष्ट रूप से देखा जा सके।
मलेरिया के लिये रक्त की परीक्षा विधि का वर्णन आरम्भ करने से पहले मलेरिया और उसके रोगाणुओं से सम्बन्धित कुछ बातों का स्मरण कर लेना आवश्यक होता है।

मलेरिया यह एक प्रकार का बुखार है जो मनुष्य में मलेरिया परजीवी के रहने से हता है।
यह बुखार कँपकँपी के पश्चात तेज ज्वर के रूप में प्रतिदिन या एक दिन छोड़कर होता है।

मादा एनाफिलीज मच्छर में मलेरिया परजीवी खून चूसने के समय प्रविष्ट होता है और 10-15 दिन तक पलने के बाद ही मादा मच्छर जब स्वास्थ व्यक्ति को काटती है तो जनमानस में रोग फैलता है।
उस व्याक्ति को 8-10 दिन बाद पहली बार बुखार आता है।
मलेरिया परजीवी मनुष्य की लाल रक्तकोशिकाओं (R.B.C.s) में पाया जाता है।

मलेरिया का परजीवी करण
मलेरिया दो कारणों से एक प्रमुख बीमारी होती है।
1.अफ्रिका, एशिया व दक्षिण अमरीका में प्रति वर्ष 1.5-2 करोड़ लोग इसका शिकार होते है। यहाँ तक कि कई जगह यह रोग मौत का सबसे महत्वपूर्ण कारण है।
2.यध्दपि इसका प्रसार रोकना संभव है ? क्योंकि इसका केवल एक ही रोग कोष है (मनुष्य)
इसके प्रसार के लिये एक ही प्रकार का कीड़ा है- एनाफिलीज मच्छर की मादा: किन्तु फिर भी कई कारणों से इसका प्रसार अब तक नहीं रोका जा सका है।
मलेरिया रोग प्लाज्मोडियम जीनस के जीवाणु से होता है एवं मनुष्य मे रोगकारी मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से पहुँचता है। जीवाणु चार प्रकार के होते हैं।
1.प्लाज्मोडियम फैल्सीपैरम (सबसे घातक)
2.प्लाज्मोडियम वाइनेक्स (सबसे अधिक)
3.प्लाज्मोडियम मलेरी (भारत में अप्राप्य)
4.प्लाज्मोडियम ओवेल (भारत में अप्राप्य)
नैदानिक महत्व एवं लक्षण
जैसा कि जीवन चक्र में दिखाया गया है, मीरोजोइट रक्त में हर 48-72 घण्टे पर आते हैं (यह अलग-अलग प्रकार पर निर्भर है) के अनुसार मलेरिया का निम्न वर्गीकरण किया गया है।
1.टर्शियन- जीवन चक्र 36-48 घण्टे में पूरा।
(a) वेनाइन टर्शियन- वाइवेक्स व्दारा
(b) मेलिग्नेंट टर्शियन- फैल्सीपैरम व्दारा
2. क्वार्टन- जीवन चक्र 72 घण्टे में पूरा एवं यह पी. मलेरी व्दारा होता है। कभी-कभी 2 तरह के संक्रमणों के कारण कोटिडियन मलेरिया (24 घण्टे का जीवन चक्र)
भी हो सकता है जिसमें एक परीजीवी 1,3,5 दिन पर व दूसरा 2,4,6 दिव पर जीन चक्र पूरा करे।

आजकल ऐसा भी देखने में आ रहा है कि मलेरिया का असमान व कभी-कभी लगातार भी होता है।
मूल मलेरिया ज्वर का विवकण:-
विभिन्न प्रकारों के अनुसार सेक्रमण के 1-2 हफ्ते के बाद ज्वर होता है एंव वह निम्न 4 स्तरों से गुजरता है।
1.पहली स्थिति:- इसमें थकान, शरीर दर्द एंव सिर दर्द। कभी-कभी ठंड भी लग सकती है। यह 2-3 दिन तक चलता है।
2.गर्मी की स्थिति:- यह मलेरिया का सबसे खास लक्षण है। इसमें रोगी को तेज ठण्ड व कँपकँपी होती है। रोगी का तापमान 40 C तक चला जा सकता है। यह कुछ घण्टे रहता है।
3. टूटन की स्थिति:- इसमे ज्वर अचानक खत्म हो जाता है एवं सामान्य या असामान्य (सामान्य से नीचे) के स्तर तक चला जाता है। रोगी को काफी पसीना आता है एंव कभी-कभी उल्टी भी होती है।
4. वापिसी की स्थिति:- रोगी ज्वर रहित होने पर अत्यधिक थका हुआ रहता है।

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