जन्मशताब्दी विशेष राष्ट्रीय दुग्ध दिवस

(देव मणि शुक्ल )

आज से 100 साल पहले किसी ने सोचा नहीं होगा कि केरल में एक ऐसी शख्सियत जन्म लेगी जो कि देश के हर उस जरूरतमंद व्यक्ति के दिल और दिमाग में स्थान बना लेगा और हर घर की पसन्द बन जायेगा जिनकी बात हो रही है वो थे डॉक्टर वर्गीज कुरियन , डॉ कुरियन कोई नया नाम नहीं है आज ही के दिन आज से 100 वर्ष पूर्व केरल के कोझिकोड जिले में जन्म हुआ था डॉक्टर कुरियन ने मैकेनिकल से अपनी पढ़ाई की और वह पढ़ाई में अब्बल रहे आज उनका 100 वा जन्मदिन सम्पूर्ण देश में बड़ी धूम धाम से मनाया जा रहा है उनके जन्मदिन के अवसर पर दूध से संबंधित अनेक संस्थानो में 15 दिन से उनका जन्मदिन उत्साह के साथ मनाया जा रहा है डॉ कुरियन (26 नवम्बर 1921 – 9 सितंबर 2012) एक प्रसिद्ध भारतीय सामाजिक उद्यमी थे और ‘फादर ऑफ़ द वाइट रिवोल्युशन’ के नाम से अपने ‘बिलियन लीटर आईडिया’ (ऑपरेशन फ्लड) – विश्व का सबसे बड़ा कृषि विकास कार्यक्रम – के लिए आज भी मशहूर हैं।

इस ऑपरेशन ने 1998 में भारत को अमेरिका से भी ज्यादा तरक्की दी और दूध-अपूर्ण देश से दूध का सबसे बड़ा उत्पादक बना दिया| डेयरी खेती भारत की सबसे बड़ी आत्मनिर्भर उद्योग बन गयी। उन्होंने पदभार संभालकर भारत को खाद्य तेलों के क्षेत्र में भी आत्मनिर्भरता दी। उन्होंने लगभग 30 संस्थाओं कि स्थापना की (AMUL, GCMMF, IRMA, NDDB) जो किसानों द्वारा प्रबंधित हैं और पेशेवरों द्वारा चलाये जा रहे हैं। गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ (GCMMF), का संस्थापक अध्यक्ष होने के नाते डॉ॰ कुरियन अमूल इंडिया के उत्पादों के सृजन के लिए ज़िम्मेदार थे। अमूल की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी की उन्होंने प्रमुख दुग्ध उत्पादक राष्ट्रों मैं गाय के बजाय भैंस के दूध का पाउडर उपलब्ध करवाया| डॉ॰ कुरियन की अमूल से जुडी उपलब्धियों के परिणाम स्वरुप तब प्रधान मंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने उन्हें 1965 में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड का संस्थापक अध्यक्ष नियुक्त किया ताकि वे राष्ट्रव्यापी अमूल के “आनंद मॉडल” को दोहरा सकें. विश्व में सहकारी आंदोलन के सबसे महानतम समर्थकों में से एक, डॉ॰ कुरियन ने भारत ही नहीं बल्कि अन्य देशों में लाखों लोगों को गरीबी के जाल से बाहर निकाला है।

डॉ॰ कुरियन को पद्म विभूषण (भारत के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान), विश्व खाद्य पुरस्कार और सामुदायिक नेतृत्व के लिए मैग्सेसे पुरस्कार सहित कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया था। उनके जीवन में अगर सबसे ज्यादा चर्चित था वो था ऑपरेशन फ्लड जो कि ऑपरेशन फल्ड या धवल क्रान्तिविश्व के सबसे विशालतम विकास कार्यक्रम के रूप मे प्रसिद्ध है। सन् 1970 में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (एनडीडीबी) द्वारा शुरु की गई योजना ने भारत को विश्व मे दुध का सबासे बढा उत्पादक बना दिया। इस योजना की सफलता के तहत इसे ‘श्वेत क्रन्ति’ का पर्यायवाची दिया गया। सन् 1949 मे डॉ कुरियन ने स्वेछापूर्वक अपनी सरकारी नोकरी को त्याग कर कैरा जिला सहकारी दुग्ध उत्पादक संघ (के डी सी एम पी ऊ एल), जोकि अमूल के नाम से प्रसिद्ध है, से जुड़ गए। तब ही से डॉ कुरियन ने इस सन्स्थान को देश का सबसे सफल संगठन बनाने मे सर्वश्रेष्ठ योगदान दिया है। अमूल की सफलता को देख कर उस समय के प्राधानमंत्री ने राष्ट्रीय डेयऱी विकास बोर्ड का निर्माण किया और उसके प्रतिरुप को देश भर मे परिपालित किया। उन्होने डॉ कुरियन की उल्लेखनीय एवं ऊर्जस्वी नेतृत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्है बोर्ड के अध्यक्ष के रूप मे चुना। उस समय सबसे बड़ी समस्या धन एकत्रित करने की थी। इसके लिये डॉ कुरियन ने वर्ल्ड बैंक को राज़ी करने की कोशिश की और बिना किसी शर्त के उधार पाना चाहा।

जब वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष 1969 मे भारत दर्शन पर आए थे। डॉ कुरियन ने कहा था-“आप मुझे धन दीजिए और फिर उसके बारे मे भूल जाये।” कुछ दिन बाद, वर्ल्ड बैंक ने उनके ऋर्ण को स्वीकृति दे दी। यह मदद किसी ऑपरेशन क हिस्सा था- ऑपरेशन फलड। डॉ कुरियन ने और भी कई कदम लिये जैसे दुध पाउडर बनाना, कई और प्रकार के डेयरी उत्पादों को निकालना, मवेशी के स्वास्थ्य पर ध्यान केंद्रित करना और टीके निकामना इत्यादि। ऑपरेशन फल्ड तीन चरणों मे पूरा किया गया। इस तीन टीयर मॉडल ने देश मे दुग्ध क्रांति लाने मे अहम भूमिका निभाई है। आज की स्तथि की बात की जाये तो हमारे देश में दूध की नदिया बह रही है क्यो की हमारे भारत सरकार के आंकड़े बताते है की अमूल 35 लाख किसानों से 2.50 करोड़ लीटर दूध रोजाना लेता है जिसकी 2600 ट्रक के जरिये सम्पूर्ण देश के 87 दूध प्लांट में प्रोसेसिंग होती है और आज हम अपने दैनिक जीवन में कोई न कोई अमूल का खाद्य पदार्थ उपयोग कर रहे है और सम्पूर्ण देश में आज दुग्ध के उत्पादन की बात की जाये तो 198.4 मिलियन टन है जो कि हर वर्ष 5-6% उत्पादन में वृद्धि कर रहा है जिस अमूल की नींव डॉ कुरियन ने बहुत छोटे स्तर रखी थी जिसका टर्न ओवर लगभग 40 हजार करोड़ तक पहुँच गया है आज इस टर्नओवर को पहुँचाने में सबसे अहम योगदान हमारी मातृशक्ति का है इसी तरह देश में दुग्ध की नदियां बहती रहे और किसान और देश समृद्धि की तरफ बढ़ता रहे।

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