आटो चालक खुलेआम उड़ा रहे है नियमों का धज्जियाँ, 3 सवारी के बजाय 15 सवारी ले जाते है।

नोएडा 01 सितंबर 2021 (समाज जागरण)

कानपुर में हुए हादसे के बाद एक बार ऐसा लगा था कि हालात सुधर जायेंगे और प्रशासन नियम तोड़ने वालों के साथ सख्ती से निपटेंगे। उस दर्दनाक घटना को कौन भूल सकता है। उल्टे साइड से आ रहे आटों में बस नें टक्कर मार दिया था, जिसमें 18 लोगों के दर्दनाक असमय काल के गाल में समा गया। मतलब यह कि वह आटो नियम के विरुद्ध 18 सवारी बिठा रखा था और उल्टे साइड से चल रहा था और उसमें बैठे सभी लोग इस भयंकर भूल से अनजान बैठा था। जिसका नतीजा देखने को मिला। उसके बाद उत्तर प्रशासन नें त्वरित संज्ञान लेते हुए कारवाही की और सभी आटो में तीन सवारी और ई-रिक्शा में 2 से ज्यादा सवारी होने पर चालान काटा गया। महज यह एक्शन सिर्फ कुछ घंटों के लिए ही रहा, उसके बाद तो जैसा पहले था वैसा ही हो गया।

भारत के स्मार्ट सिटी में शुमार नोएडा शहर की तस्वीर कितना बदला और क्या इसको एक स्मार्ट सिटी कहना व्यवहारिक होगा। नोएडा के परिवहन व्यवस्था की जायजा लेने के लिए निकलिए तो आपको पता चलेगा कि कैसे आटो वाले , ई-रिक्शा वाले यातायात नियमों का धज्जियाँ उड़ा रहे है। आपको तीन सवारी वाले आटो में 15 सवारी तक देखने को मिल जायेंगे। 12 सवारी तो आम बात है। 4-4 सवारी बीच में और 3 सवारी ड्राईवर सीट पर और एक ड्राइवर स्वयं। इसके अलावा आपकों आटों के पीछले सीट पर लटके हुए भी 3 सवारी मिल जायेंगे। जैसा कि इस आटो में दिख रहा है। यह सेक्टर 100 रेड लाइट 31 अगस्त शाम 6 बजे की विडियों है जो आप देख रहे है। जबकि प्रशासन स्वयं लिखकर देती है कि किसी भी प्रकार के आटो में सिर्फ 3 सवारी ही ले जाने की अनुमति है। इसके अलावा आप गाड़ी के फिटनेस को भी देख ही सकते है कि कितना फिट है। ऐसे हजारों के संख्या में आपकों मिल जायेेगे। यह मात्र एक नमुना है। ऐसे न जाने कितने आटो आपको इसी तरह से नियम तोड़ते मिल जायेंगे। क्योंकि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मी को तो सिर्फ टू-व्हीलर का चालान काटना है।
ई-रिक्शा वाले भी पीछे क्यों रहे ? भले ही उनको 2 सवारी तक ढोने के लिए अनुमति दिया गया हो लेकिन जल्दी से ज्यादा कमाने के चक्कर में 8 सवारी तक बिठा लेते है। भले ही रिक्शा सड़कता न हो लेकिन सवारी होनी चाहिए पूरे 8। 6 सवारी सीट पर और 2 सवारी ड्राइवर सीट पर। कई बार तो पीछे भी लकड़ी के फट्टे लगाकर बिठा लेते है यानि पूरे 12 सवारी।
लेकिन सवाल उठता है कि क्या यह सब नोएडा यातायात पुलिस के पीठ पीछे हो रहा है ? नही ! सुबह शाम की ये खेल खुलेआम बीच सड़क पर किया जा रहा है। भले ही नोएडा के यातायात पुलिस इसे देखना पसंद नही करते हो या फिर इनका भी कोई गुप्त डायरी हो। क्योंकि टू-व्हीलर पर पीछे बैठे सवारी अगर बिना हेलमेट है उनके तो चालान काट दिए जाते है लेकिन आटो वाले ई रिक्शा वाले हर रोज जब पिक-अप-आवर हो ऐसे ही मनमानी करते है। सवारी बेचारा चुप ही रहता है क्योकि बोलेगा तो बोलेगा कि बोलता है इसलिए कुछ नही बोलेगा।
अपना एक पड़ोसी है नाम उसका जोशी है।

अब आप भारत के 25वें नंबर के स्मार्ट सिटी और पहले नंबर पर पहुँचने के दौड़ लगा रहा नोएडा में अतिक्रमण की तो बात ही निराली है। सरकारी अतिक्रमणों को नही रोक पा रहे है तो प्राईवेट की बात तो सोचना भी दूर की ढोल लगता है। सड़कों पर जगह-जगह लगे पान बीड़ी गुटखा की दुकान और उस पर बैठे पनवारी की बात तो छोड़िये। नारियल वाले भी पीछे नही है। अधिकतर नारियल वाले न सिर्फ अतिक्रमण करके दुकानदारी कर रहा है बल्कि वही पर रहने खाने और सोने का व्यवस्था भी कर लिया है। अगर हम सीधी भाषा में कहे तो सड़क किनारे जगह-जगह झुग्गी डाले जा रहे है। एक बात और पता चला है कि यह लोग ज्यादातर दूसरे काम करते है जैसे ड्राइवरी वगैरह लेकिन रहने के लिए नारियल की दुकान लगाते है। कुछ वेंडर भी है जो नारियल बेचते है लेकिन वो समय से आते है और समय से ही दुकान बंद करके चले जाते है।

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