सभी बिल्डर प्रोजेक्ट की जानकारी मिडिया के माध्यम से उपलब्ध कराये प्राधिकरण: अनिल के गर्ग

समाज जागरण नोएडा रमन झा 01 मार्च 2022

नोएडा में एक नही बल्कि सैकड़ों टवीन टावर्स है। जो प्राधिकरण के सुस्ती के कारण अवैध तरीकेे के बने हुए है या नियम का पालन नही किया गया है। इसके बावजूद शहर के बड़े बड़े अखबार में बड़ा बड़ा विज्ञापन देकर बिल्डर्स और प्रमोटर्स के द्वारा लोगों (इन्वेस्टर्स) को गुमराह किया जा रहा है। एक तरफ जहाँ टवीन टावर को लेकर माननीय सुप्रीम कोर्ट की सख्ती आदेश के बाद भी एक साल गुजर जाने के बाद अब उसका खाका तैयार कर गिराने की आदेश दिए गए है। प्राप्त सुत्रों के अनुसार विदेशी कंपनी के द्वारा बिल्डिंग को 22 मई तक ध्वस्त किए जाने की समय सीमा तय किया गया है। चलिए देर आये दुरुस्त आये, आये तो।

लेकिन समस्या सिर्फ एक टवीन टाॅवर नही बल्कि शहर में बने सैकड़ोंं टवीन टाॅवर है। नोएडा के वरिष्ठ नागरिक व अधिवक्ता अनिल के गर्ग ने समाज जागरण को बताया कि नोएडा शहर में सैकड़ो टाॅवर नियमों का उल्लंघन करते हुए बनाये गए है। बहुत सारे बिल्डर डिफाल्टर घोषित किए गए है। बहुत सारे बिल्डर है जिस पर लैंड ड्यूज है (भूमि का बक्या) । बहुत सारे ऐसे प्रोजेक्ट है जिसमें एफएआर कुछ दिए गए है और बिल्डर ने बनाए कुछ है। टवीन टावर की तरह ही बहुत सारे हाइराइज बिल्डिंग में नियमों को ताक पर रख कर निर्माण कराये गए है। दिल्ली एनसीआर भूकंप संभावित जोन चार में होने के बावजूद बिल्डिंग को उस हिसाब से तैयार नही किए गए है या जा रहे है।

श्री गर्ग नें आगे बताया कि ” इतना सबकुछ होने के बावजूद भी शहर के बड़े बड़े अखबार में बड़े बड़े लुभावने स्कीम दिखाकर इन्वेस्टर्स को गुमराह किए जा रहे है। प्राधिकरण को चाहिए कि डिफाल्टर बिल्डर प्रमोटर्स, के नाम हर सप्ताह में एक बार अखबार के माध्यम से टीवी के माध्यम से या प्राधिकरण अपने वेवसाइट के माध्यम से जनता तक पहुँचाए। किस बिल्डर पर कितना लैंड ड्यूज है, उसने अभी तक एनओसी लिया है या नही। जो एफएआर दिया गया था उसी के हिसाब से बिल्डिंग का निर्माण कराया गया है। यह सब जानकारी देना प्राधिकरण के कर्तव्य है। ताकि लोग समय रहते ही सही फैसला कर सके और अपने खून पसीने की कमाई बिल्डरों कों देने से बचे। इससे सही बिल्डर को फायदा मिलेगा और जल्दी जल्दी निर्माण कार्य हो पायेंगे।

श्री गर्ग नें कहाँ कि आखिर टवीन टाॅवर को गिराने से नुकसान किसका हुआ है। प्राधिकरण के भ्रष्ट अफसर जिसके लापरवाही से 24 मंजिल के जगह 40 मंजिल बन गया उस पर भी कुछ नही हुआ न होगा। बिल्डर प्रमोटर्स को ऐसे ही कुछ नही बिगड़ा है, वह तो घर खरीदारों के द्वारा दिए गए पैसे के ब्याज से ही यह सब काम कर रहा होगा। 600 घर खरीदारों नें इस टाॅवर में अपना घर बुक कराये हुए है। 1.31 करोड़ से लेकर 2.45 करोड़ की एक प्लैट है। कुल मिलाकर लगभग 1200 करोड़ इन्वेस्टर्स के पैसे बिल्डर के जेब में है। हाल के दिनों में देखा गया है कि 5 करोड़ की फ्लैट के लिए 3.5 करोड़ कि विज्ञापन दिया गया। ऐसा लगा कि बहुत हड़बड़ी है और जल्दी से बेचने के चक्कर में है। संभवत: उन फ्लैटों मैे भी टवीन टावर की तरह ही नियमों की अनदेखी हुई है।

परेशान तो घर खरीदार है न घर मिला न पैसा। स्पोर्टस सिटी को ही ले लिजिए। 35 हजार घर खरीदारों को इंतजार है अपने घर की मालिक कब बनेंगे। बिल्डर ने प्राधिकरण के जमीन के पैसे नही दिए है, प्राधिकरण उसको एनओसी नही देगी और घर खरीदार अपने ही घर में उसके मालिक नही होंगे। इसलिए सभी प्रोजेक्ट के बारे में प्राधिकरण अपने तरफ से समय समय पर जानकारी प्रकाशित करवाये तो बेहतर है।

क्योंकि चिडियाँ खेत चुग जाए उसके बाद कुछ नही हो सकते है। लाखों घर खरीदार परेशान है। जिनको घर नही दिए जा रहे है। एक दशक गुजर जाने के बाद भी उनकों सड़क पर उतर कर प्रदर्शन करने की नौबत आन पड़ी है। जब जेब से पैसे निकल गए है तो आप कर भी क्या सकते है। कोर्ट केस में वर्षों गुजर जाने के बाद भी कुछ नही मिलते है। एक कामकाजी लोगों के लिए कोर्ट और प्राधिकरण का चक्कर काटना भी आसान नही होता है। घर के खर्चे चलाए, बैंक के ईएमआई भरे या फिर मकान के किराया।

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