दिल्ली दिलवालो का नही अब ठेकेवालो का हैँ

कहते हैँ दिल्ली दिलवालो का शहर हैँ लेकिन पिछले कुछ दिनों से ये दारुवालो का शहर बना हुआ हैँ. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की तस्वीर अब ठेके के बाहर फ्री के दारू लेने के लिए लाइन मे लगे शराबियों से भरे पड़े हैँ.

दिल्ली कभी शिक्षा और राजनितिक के लिए जाने जाते थे अब दारू और दंगे के लिए जाने जाते हैँ. देश के राजधानी दिल्ली के मुख़र्जी नगर जहान हर सालो लाखो के संख्या मे बच्चे पढ़ने आते है. आजकल काफी चर्चा मे हैँ.

चर्चे का कारन हैँ देश के वो भविष्य जो आये थे पढ़ने लेकिन अब दारू के ठेके पर लाइन मे लगे हैँ. मुख़र्जी नगर ठेके से आया वो तस्वीर काफी हैरान और परेशान करने वाला हैँ.

आखिर गरीब माँ बाप के एक सपना होते हैँ की उनके बेटा पढ़ लिखकर अच्छा आदमी बने. देश को मार्ग दर्शन करे. लेकिन उन माँ बाप को क्या पता हैँ की अब दिल्ली पढ़ने लायक नही रहा.

एक तरफ जहान गन्दी राजनितिक का काली छाया पड़ रहा हैँ वही दूसरी तरफ हिन्दुओ को बर्बाद करने की साजिश भी दिल्ली सरकार के द्वारा खेला जा रहा हैँ. पहले दंगा फिर दारू की होम डिलीवरी और अब दारू एक पर एक फ्री.

भले ही अपनी राजनितिक को चमकाने के लिए बीजेपी विरोध कर रहा हो लेकिन हैँ तो सब ढोंग ही. जनता चाहे तो एक दिन मे दारू के दुकान बंद करवा. बीजेपी को दिल्ली मे 40% वोट मिलते हैँ. लेकिन वो एक ठेका भी बंद नही करवा पाया हैँ.

हाथी के खाने के दाँत कुछ और चबाने की कुछ और.

हम सभी जानते हैँ की बिहार और गुजरात मे शराब बंदी हैँ % प्रतिशत इसके बावजूद वहाँ खूब दारू मिलते हैँ. ज्यादातर दारू हरयाणा मार्का होते हैँ. हरयाणा मे बीजेपी की सरकार हैँ लेकिन खूब तस्करी किये जा रहे हैँ. हरयाणा की दारू बुलडोज़र बाबा योगी के प्रदेश उत्तरप्रदेश प्रदेश होते हुए दारू बिहार तक पहुँच जाते हैँ. आखिर हरयाणा और up मे दारू को बंद क्यों नही करवाये जा रहे हैँ.

राजनितिक चंदा मे दारू वाले, गुटखा वाले का बड़ा हिस्सा हैँ. भले ही जनता नसेरी हो जाये लेकिन इनका दुकान बंद नही होनी चाहिये. आखिर अगली बार मे जनता के लिए फ्री राशन और नेता के लिए ऐशो आराम की व्यवस्था तो इन्ही बिज़नेसमानो को करना हैँ. गाली गाली मे दारू गुटखा बीड़ी सिगरेट बेचकर ये लोग सरकार को टैक्स और राजनेता को चंदा देते हैँ.

दिल्ली को देखकर अब ये नही लगता हैँ की ये भारत के राजधानी दिल्ली हैँ. जो कभी पांडव के खंडव प्रस्थ और बाद मे इंद्रप्रस्थ हुआ करती थी. आधा दिल्ली अब मुगलो की शहर और आधे मे पश्चिम की लहर हैँ. गलियों से जहान मीट की दुर्गन्ध आते हैँ वही कुछ एरिया मे पश्चिमी सभ्यताओं की झलक दिखती हैँ.

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