यूपी में महिला सशक्तिकरण का नायाब नमूना, पति पुलिस में और पत्नि उससे जान बचाने के लिए भागती फिर रही है

समाज जागरण

जब सईया भये हवलदार तो डर काहे की, लेकिन मामला बिल्कुल उल्टा है महिला इसलिए डर रही है क्योंकि उसका पति हवलदार है।

वाह रे योगी की पुलिस, क्या मिशाल पेश किया है महिला सशक्तिकरण की। अगरजो महिला कह रही है वो ठीक है तो पुलिस के लिए इससे ज्यादा शर्मशार करने वाली घटना क्या हो सकती है। एक पत्नि अपने पति से छुपती फिर रही है क्योंकि उसका पति पुलिस में नौकर करता है। महिला के साथ मार-पीट किया जाता महिला 1090 पर फोन करती है, 1090 फोन को 112 पर ट्रांसफर करती है,फिर महिला को महिला थाने ले जाया जाता है लेकिन न्याय नही मिलता है क्योंकि उसका पति पुलिस में है।
योगी सरकार में पुलिस इस प्रकार से काम करे यह तो कतई किसी नें सोचा भी नही होगा, लेकिन पुलिस भी तो आज की नही है इससे पहले जो सत्ता रहे है , जिसमें गलती से लड़के हो जाते है और लड़कों से गलती हो जाते है वाली मानसिकता के लोग सत्ता में बैठे थे। उससे पहले बहन जी घन बटोरने में इतना मग्न थी कि उनको महिला सुरक्षा पर ध्यान ही नही गया। पुलिस भी बेलगाम थी और बदमाश भी, हालांकि बहन जी को बेहतर प्रशासन की तमगा जरूर दिये जा रहे है।
सवाल यो यह भी है कि क्या योगी सरकार में इसी को महिला सशक्तिकरण कहते है। पहली नजर मे तो देखकर यही लगता है कि महिला को न्याय नही दिया गया है अन्यथा कोई महिला अपने पति अपने घर को छोड़कर दर-दर की ठोकरे खाने को मजबूर क्यों होती। घर को स्वर्ग औऱ नरक बनाने वाली महिला की दशा इसीसे पता चलता है

उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर की यह घटना है, महिला के पति सिपाही पवन कुमार है, जिससे जान बचाकर महिला सड़को पर भटक रही है।

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