6 करोड़ की फ्लैट सिर्फ 4 करोड़ में, जल्दी करें और 31 % का आफर

नोएडा सेक्टर 94 स्थित सुपरटेक SPIRA में अचानक रेट कम कर दिया है, इसके साथ ही रेडी टू मूव के लिए भी आफर दिया गया है। शहर के प्रतिष्ठित अखबार में छपे इस विज्ञापन से प्रापर्टी में इन्वेस्ट करने वालों के लिए और सतर्कता बढ़ा दी है। कारण है हाल ही मे सुप्रीम कोर्ट के द्वारा एमराल्ड कोर्ट को लेकर दिया गया फैसला। जिसमें 24 मंजिल की इजाजत लेकर 40 मंजिल बिल्डिंग बना दिया गया।

एडवरटाईजमेंट के बाद जो संदेह किया जा रहा है उसका मुख्य दो कारण है। सबसे पहली बात अचानक से सुपरटेक के प्रापर्टी में आये गिरावट को लेकर है। अचानक से किसी भी प्रापर्टी में 31 प्रतिशत का गिरावट है। क्या बाकई में सुपरटेक इतने में प्रापर्टी देना चाहता है ? अगर हाँ तो क्यों ? प्राधिकरण को चाहिए कि इस पर भी जांच करें। दूसरी बात क्या इन बिल्डिंग के लिए ली गयी जमीन का पैसा प्राधिकरण को दे दिया गया है ? प्राधिकरण इसके रजिस्ट्री के लिए तैयार है ? किसी भी खरीदारों के लिए या इन्वेस्टर्स के लिए जरूरी है कि नोएडा में किसी भी प्रापर्टी को खरीदने से पहले नोएडा प्राधिकरण से लिखित में जरूर लेनी चाहिए। जैसा कि देखने को मिला है पिछले दो दशक से घर खरीदारों को किस प्रकार से बहलाया जा रहा है। लाखों घर खरीदार और इन्वेस्टर बिल्डर को जेब मे पैसे देने के बाद भी परेशान है। ऐसे में सुपरटेक के द्वारा किये जा रहे एडवरटाईटमें पर कितना विश्वास किया जाना चाहिए।
हाल ही में नोएडा सेक्टर 93 में एमराल्ड कोर्ट का मामला सामने है जिसमें माननीय सुप्रीम कोर्ट के द्वारा प्राधिकरण के लिए कहे गए शब्द भी काफी महत्वपूर्ण था। मामले में एसआईटी नें जांच करके वापस लौटी है कारवाई का इंतजार है। नोएडा प्राधिकरण नें भी बिल्डिंग तोड़ने के लिए टेंडर निकालने कि बात की है क्योंकि उसके आस-पास और भी बिल्डिंग है जिस पर फर्क न पड़े। जाहिर ही सी बात है न कोई कंपनी मिलेंगे न बिल्डिंग तोड़े जायेंगे। इतने में सुपरटेक कोई न कोई हल निकाल ही लेगी। फंसा तो बेचार घर खरीदार 10 साल और इंतजार।

बता दे कि सुपरटेक बिल्डर नोएडा में सबसे बड़े बिल्डर में से एक है। इसके साथ यह भी कहना होगा कि सबसे ज्यादा खरीदार भी सुपरटेक के है, और सबसे ज्यादा घर खरीदार परेशान भी सुपरटेक है। प्राधिकरण की सबसे ज्यादा बकाया भी सुपरटेक पर है, माननीय कोर्ट का फैसला भी सुपरटेक पर है।
अचानक प्रापर्टी की रेट गिराकर बेचना कही दाल में काला तो नही या फिर पूरी दाल ही काला तो नही है। अचानक से 31 प्रतिशत कि गिरावट का मायने है कि सुपरटेक इसको जल्दी से सेल करना चाहता है। इसके दो कारण हो सकते है या तो सुपरटेक जल्दी से बेचकर आर्थारिटी का पैसा देना चाहता हो या फिर नये ग्राहक को झांसा देने का काम किया जा रहा हो। क्योंकि अगर 10 % भी लिया जायेगा तो 40 लाख, अगर 100 युनिट बेचा गया तो 40 करोड़ इकट्ठा किया जा सकता है।

नोएडा शहर के वरिष्ठ नागरिक व अधिवक्ता श्री अनिल के गर्ग नें कहा है।

नोएडा प्राधिकरण को इस मामले में जांच करके सार्वजनिक करना चाहिए। ताकि आम जनता और इन्वेस्टर्स गुमराह होने से बच सके। मासिक तौर पर किस बिल्डर पर कितने बकाया है और कहाँ कहाँ कि रजिस्ट्री नही हो सकते है उसके बारे में अखबार और इलेक्ट्रानिक मिडिया के माध्यम से पहुँचाने की जरूरत पर ध्यान देना चाहिए।

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