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समाजवादी पार्टी से गठबंधन और तमाम नेताओं के बसपा सुप्रीमो मायावती के प्रति नरम बयानों

समाजवादी पार्टी से गठबंधन और तमाम नेताओं के बसपा सुप्रीमो मायावती के प्रति नरम बयानों ने उनका कद एकाएक बढ़ा दिया है. सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव उन्हें जिस तरह तवज्जो दे रहे हैं उससे ऐसा लगने लगा है कि वह कम से कम लोकसभा चुनावों में बीएसपी को सपा से बड़ी ताकत मान रहे हैं. हरियाणा में इंडियन नेशनल लोकदल और छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी की पार्टी बसपा के साथ हाथ मिला रखा है. जबकि महाराष्ट्र में एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार बसपा को गठबंधन में हिस्सा बनाने की बात कह चुके हैं. ऐसे में बसपा सुप्रीमो की धमक यूपी ही नहीं बल्कि देश भर के राज्यों में भी नजर आ रही है.
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने लखनऊ में आकर जिस तरह से मायावती का आशीर्वाद लिया है उससे यह तय माना जा रहा है कि सपा-बसपा गठबंधन को बिहार में भी तवज्जो मिलने जा रही है. मायावती के जन्मदिन पर अजीत जोगी समेत तमाम नेताओं का मिलना यह बताता है कि बसपा अध्यक्ष को सियासी तौर पर कम करके नहीं आंका जा रहा है.
बसपा आज भले ही आधिकारिक रूप से राष्ट्रीय पार्टी न हो लेकिन कर्नाटक, मध्य प्रदेश और राजस्थान में पार्टी का विधायक चुने जाने के बाद बसपा की धमक बढ़ गई है. छत्तीगढ़ में भी बसपा ने अजीत जोगी की पार्टी से गठबंधन करके राजनीतिक समीक्षकों का ध्यान अपनी ओर खींचा है.
बता दें कि यूपी में सपा-बसपा गठबंधन से पहले ही मायावती देश के अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग दलों के साथ हाथ मिलाकर चुनावी किस्मत आजमा चुकी है. कर्नाटक में जेडीएस के साथ मिलकर चुनाव लड़ा और उनकी पार्टी का एक विधायक जीतने में सफल रहा. इसके अलावा छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी की पार्टी के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरी और दो विधायक जीतने में सफल रहे हैं. इसके अलावा हरियाणा में इनेलो के साथ गठबंधन किया है. जबकि महाराष्ट्र के दिग्गज नेता शरद पवार कह चुके हैं कि महाराष्ट्र में से बसपा का एक सांसद चुना जाना चाहिए.
देखा जाए तो तीसरे मोर्चे के प्रयास में लगे चंद्रबाबू नायडू, गैर बीजेपी गैर कांग्रेस का नारा बुलंद करने वाले तेलंगाना के सीएम के. चंद्रशेखर राव और अब कांग्रेस से परहेज न करने वाली ममता बनर्जी से मायावती आगे निकलती दिख रही हैं. अखिलेश पहले ही कह चुके हैं कि प्रधानमंत्री यूपी से होना चाहिए, सभी जानते हैं कि उनके पिता मुलायम सिंह की इच्छा पीएम बनने की है लेकिन जिस तरह से अखिलेश माया को तवज्जो दे रहे हैं उससे कहीं से ऐसा नहीं लगता कि वह पीएम पद के लिए मायावती का विरोध कर सकेंगे.
मायावती के जन्मदिन पर बसपा प्रवक्ता सुंधीद्र भदोरिया ने जिस तरह से ट्वीट करते हुए उन्हें बधाई दी थी और लिखा था ‘भारत की भावी प्रधानमंत्री बहन मायावती जी को जन्मदिन की शुभकामनाएं’. यह ट्वीट एक पोस्टर के तौर पर किया गया है जिसमें मायावती के फोटो के साथ मैसेज लिखा हुआ है. इस पोस्टर के सियासी मायने भी निकाले जाने लगे हैं. राजनीतिक जानकारों की मानें तो कहीं न कहीं पार्टी के जरिए मायावती के नाम को आगे बढ़कर बाकी दलों के रिएक्शन को देखना चाहती हैं.
महाराष्ट्र में लंबे समय तक कांग्रेस के साथ रहे रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (ए) के अध्यक्ष रामदास अठावले फिलहाल बीजेपी के साथ हैं. वह सांसद होने के साथ मंत्री भी हैं. विदर्भ का इलाके में उनकी पकड़ मानी जाती है और यहां से कांग्रेस हमेशा फायदे में रहती थी. लेकिन अठावले के बीजेपी के साथ जाने से यह समीकरण बदल गए. एनसीपी के नेता शरद पवार का मानना है मायावती को साथ लाने से इस इलाके में उनकी पार्टी को फायदा हो सकता है. ऐसे में वह बसपा सुप्रीमो मायावती और सतीश चंद्र मिश्रा से मिल चुके हैं. उनका मानना है कि बसपा का एक सांसद महाराष्ट्र से होना

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