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*संगम तट पर योग, प्रयागराज* *कुम्भ-2019, योग एवं ध्यान शिविर, दूसरा दिन*

_आत्म जागरण से लेकर के राष्ट्र जागरण, आत्म निर्माण से लेकर के राष्ट्र निर्माण, युग निर्माण का अनुष्ठान यज्ञ है ये योग।_

*योग करो तो पूरे व्यवहार काल के योग में खो जाओ, आत्मा और परमात्मा में समाहित हो जाओ।*

_भगवान को पाने के लिए कहीं जाने की जरूरत नहीं है क्योंकि जो अप्राप्त है उसको पाया जाता है, प्रभु तो सदा हमें प्राप्त हैं, लेकीन दूरी है अज्ञान, अश्रद्धा और अकर्मण्यता की। ये तीन दूरी हट गई तो भगवान प्राप्त हैं। हम स्वयं ब्रह्म हैं, ये बोध हो जाए, ये हम जान लें, अपने आप को जगा लें, यही योग है।_

*न्याय के पथ पर एकता के साथ, समानता के साथ, स्वाधीनता के साथ आगे बढ़ो। न्याय का पथ ही योग का पथ है, धर्म का पथ है, सत्य का पथ है, यही आत्म कल्याण, विश्व कल्याण का पथ है।*

_कोई भी सत्य को समझना है तो स्वयं से प्रारंभ करें।_

*हम ऋषियों के वंशधर हैं, प्रतिनिधि हैं, उत्तराधिकारी हैं। मैं एक बात हमेशा कहता हूँ की हमारा जीवन हमारे पूर्वजों जैसा होना चाहिए। हमारे पूर्वज योगी थे, निरोगी थे, समाज के लिए उपयोगी थे। हमें योगी बनना है, निरोगी बनना है, उद्योगी बनना है और समाज के लिए उपयोगी बनना है।*

*- परम पूज्य स्वामी रामदेव जी*

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