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मधुमेह( diabetes)

*#मधुमेह*

*#मधुमेग रोग के बारे में सदियों पहले भी लोगों को जानकारी थी।*
*#आयुर्वेद में इसका विवरण ‘#मधुमेह’ या ‘मीठा पेशाब’ के नाम से मिलता है।*
*#आयुर्वेदिक चिकित्सकों को इसका ज्ञान 3000 वर्ष पहले से ही था। भारतीय आयुर्वेदिक चिकित्सकों-सुश्रुत एवं चरक- ने इस रोग के बारे में एवं इसके प्रकारों के बारे में लिखा है-*

*#स्थूल प्रमेही बलवानहि एक: कृक्षरतथेव परिदुर्वलक्ष्य।*
*#संवृहणंतम कृशस्य कार्यम् संशोधन दोष बलाधिकस्य॥*

*#हरीतकी (हरड)*

*#हरीतकी को वैद्यों ने चिकित्सा साहित्य में अत्यधिक सम्मान देते हुए उसे अमृतोपम औषधि कहा है। राज बल्लभ निघण्टु के अनुसार*

*#यस्य_माता_गृहे_नास्ति, #तस्य_माता_हरीतकी ।*
*#कदाचिद्_कुप्यते_माता, #नोदरस्था_हरीतकी॥*

*अर्थात् जिसकी #माता घर में नहीं है उसकी माता हरीतकी है।*
*#माता तो कभी-कभी कुपित भी हो जाती है, परन्तु उदर स्थिति अर्थात् खायी हुई हरड़ कभी भी कुपित (अपकारी) नहीं होती।*

*#पैदल चलना*

*मंद गति से सौ कदम चलें शतपावली के संदर्भ में शास्त्र कहता है -*

*#भुक्त्वा_शतपदं_गच्छेत्।*

*अर्थात् भोजन के बाद सौ कदम चलन चाहिए।*

*इस विषय में आयुर्वेद में यह श्लोक दिया गया है -*

*#भुक्त्वोपविशत:स्थौल्यं शयानस्य रू जस्थता।*
*#आयुश्चक्र माणस्य मृत्युर्धावितधावत:॥*

*अर्थात् भोजन करने के पश्चात एक ही जगह बैठे रहने से स्थूलत्व आता है।*
*जो व्यक्ति भोजन के बाद चलता है उसक आयु में वृद्धि होती है*
*और जो भागता या दौड़ लगाता है उसकी #मृत्यु समीप आती है।*

*#प्राण का अर्थ*

*#पंच तत्त्वों में से एक प्रमुख तत्त्व वायु हमारे शरीर को जीवित रखती है*
*और #वात के रूप में शरीर के तीन दोषों में से एक दोष है, जो श्वास के रूप में हमारा प्राण है।*

*#पित्तः #पंगुः #कफः #पंगुः #पंगवो #मलधातवः।*
*#वायुना यत्र नीयन्ते तत्र गच्छन्ति मेघवत्॥*
*#पवनस्तेषु बलवान् विभागकरणान्मतः।*
*#रजोगुणमयः सूक्ष्मः शीतो रूक्षो लघुश्चलः॥* *(शांर्गधरसंहिताः 5.25-26)*

*#पित्त, #कफ, देह की अन्य धातुएँ तथा मल-ये सब #पंगु हैं,*
*अर्थात् ये सभी #शरीर में एक स्थान से दूसरे स्थान तक स्वयं नहीं जा सकते।*
*इन्हें #वायु ही जहाँ-तहाँ ले जाता है, जैसे आकाश में वायु बादलों को इधर-उधर ले जाता है। अतएव इन तीनों दोषों-वात, पित्त एवं कफ में वात (वायु) ही बलवान् है; क्योंकि वह सब धातु, मल आदि का विभाग करनेवाला और रजोगुण से युक्त सूक्ष्म, अर्थात् समस्त शरीर के सूक्ष्म छिद्रों में प्रवेश करनेवाला, शीतवीर्य, रूखा, हल्का और चंचल है।*
*नित्य करो योग रहो निरोग*
*वायु मुद्रा लगा कर करो योग रहो निरोग*
*योगी बनो उप योगी बनो उप योगी बनो*
*स्वदेशी अपनाओ संस्कृति बचाओ*
*BST सोशल मिडिया राजस्थान*

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