fbpx

भलमनसाहत

भलमनसाहत
एक बार शिवपुरी राज्य की प्रजा ने अपनी विभिन्न समस्याओं को लेकर विद्रोह कर दिया। वे लोग राजा इंद्रदत्त के खिलाफ मुर्दाबाद के नारे लगा रहे थे। तभी राजा इंद्रदत्त वहां पहुंच गए। उन्होंने विद्रोहियों पर एक नजर डाली, फिर राजदंड तथा मुकुट को हाथों में लेकर जनता के सामने आए।
राजा इंद्रदत्त को देखकर विद्रोहियों ने नारे लगाने बंद कर दिए। राजा इंद्रदत्त ने उनसे कहा,” मित्रो! इस समय मंं न तो आपको सौंपता हूं और न ही आप मेरी प्रजा हैं। मैं राजसत्ता के प्रतीक ये मुकुट और राजदंड आपको सौंपता हूं। अब मैं प्रजा की तरह रहूंगा। आपको मुझे जो जिम्मेदारी सौंपी थी, यदी मैं उसे अच्छी तरह नहीं निभा सका तो आपको अधिकार है कि आप उस जिम्मेदारी को वापस ले लें। आज से मैं भी आपके साथ खेत-खलिहानों में काम करूंगा। बस, मुझे इतना बता दें कि मैं किस खेत पर या किस बाग में कौन सा काम करूं।“
राजा इंद्रदत्त की बात सुनकर सभी विद्रोही आश्चर्य चकित रह गए। उन्हें इस बात की बिल्कुल आशा नहीं थी कि राजा इंद्रदत्त ऐसा भी कर सकते हैं।
राजा इंद्रदत्तके हटने के बाद राज्य की स्थिति में कोई भी परिवर्तन नहीं हुआ। बाजारों और चौराहों पर लोग चिल्ला उठे,” राजा इंद्रदत्त के बिना सब कुछ बरबाद हो रहा है। हमें राजा इंद्रदत्त चाहिए। उनकी तलाश की जानी चाहिए।“
इसके पश्चात सभी लोगों ने राजा इंद्रदत्त को ढूंढना शुरू कर दिया। राजा इंद्रदत्त उन्हें एक खेत में काम करते हुए मिल गए।
सभी लोग राजा इंद्रदत्त को सम्मान के साथ महल में ले गए। मुकुट को रजा के सिर पर रखकर राजदंड उनके हाथों में थमा दिया। फिर वे सब हाथ जोड़कर बोले,” महाराज! आप पूरी तरह न्याय के साथ हम पर राज कीजिए।“
राजा इंद्रदत्त ने कहा,” यदि आप सब कहते हैं तो मैं अपनी पूरी योग्यता के साथ शासन करूंगा। मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि वे मुझे न्यायपूर्वक शासन करने की योग्यता प्रदान करें तथा आपकी सभी समस्याएं दूर करने में हमारी मदद करें।“

Please follow and like us:
%d bloggers like this: