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*प्रयागराज कुम्भ – 2019*

_एक दिव्य-भव्य भारत हमको बनाना है, अपने जीवन को बड़े उद्देश्यों के लिए जीना है, जो अपने पूर्वजों ने जीवन के श्रेष्ठ आचरण बताए हैं उनको अपनाते हुए अपने पूर्वज ऋषि-ऋषिकाओं की तरह, वीर-वीरांगनाओं की तरह एक यशस्वी, पुरुषार्थी, पराक्रमी, तेजस्वी जीवन जीना है। एक रोग मुक्त, नशा मुक्त, दोष मुक्त, गरीबी मुक्त भारत बनाना है, हिंसा, असत्य, झूठ, बेईमानी, कदाचार, दुराचार, लूटमार, अपवित्रता, असंतोष, आत्म विमुक्ता और नास्तिकता से मुक्त भारत बनाना है। दिव्यता से युक्त भारत, दिव्य-भव्य भारत तो तभी बनेगा न जब हम योगी बनेंगे।_

*कैसा है मेरा भारत, क्या है भारत की पहचान, संस्कृति, स्वभाव, सारी दुनिया भारत आ रही है और यहाँ से कैसे जीवन जीना है सीख कर जाती है। योग, अध्यात्म, भारतीय संस्कृति, वैदिक परंपरा यह जीवन पद्धति है। जहाँ ज्ञान-विज्ञान का पूरा संगम है, भौतिक विकास और आध्यात्मिक विकास का संगम है, मनुष्य और मनुष्यता का संगम है।*

_यदि भीतर की त्रिवेणी में स्नान नहीं किया तो बाहर की त्रिवेणी में स्नान किया हुआ पुण्य पूरा नहीं मिलेगा। इसलिए पहले भीतर की त्रिवेणी में स्नान करो और संकल्प लो कि मैं जीवन में एक पग भी पापों की तरफ नहीं धरूंगा, यह है पापों से मुक्ति का उपाय।_

*लाचारियों से मुक्त भारत, गरीबी से मुक्त भारत, बेरोजगारी से मुक्त भारत, ये बड़े संकल्प हैं हमारे और पतंजलि का जो आंदोलन है, ये जो योग का आंदोलन है वो इसके लिए है।*

_राम मंदिर भी बनाएंगे और राम सीता जैसा राष्ट्र का चरित्र भी बनाएंगे और राम राज्य लाएंगे।_

*हम सब एक संकल्प लेंगे कि हम सब योग धर्म को, वेद धर्म को अपनाकर स्वधर्म का, राष्ट्र धर्म का प्रामाणिकता से पालन करेंगे और कराएंगे, अपने भीतर योग शक्ति, प्रभु भक्ति और राष्ट्र भक्ति जगाएंगे। सबको योगी, कर्म योगी, उपयोगी बनाएंगे, अपने हाथों से अपनी आँखों के सामने स्वस्थ, समृद्ध, संस्कारवान और परम वैभवशाली भारत बनाएंगे।*

*- परम पूज्य स्वामी रामदेव जी*

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