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*जिंदगी के जंग में जब तन्हा हों*

जब आप तन्हा हों क्या करें। मादक पदार्थो के बारे में तो कभी न सोंचें क्यों कि इनकी एक बार लत लग गयी तो आपका मौलिक, नैतिक सारा पतन करके ही छोड़ेगी और आप तन्हा के तन्हा ही रह जायेंगे। ऐसे में उन लोंगो को अपनी तकलीफ बताने के लिए बिलकुल भी न चुने जो आपकी हिम्मत बढ़ाते तो नहीं बल्कि दुनिया का डर दिखाकर आपको कमजोर बनाते हैं। यदि आपका दिल रोने का कर रहा तो अपने आपको रोकें नहीं बंद कमरे में दर्द बह जाने दें परंतु समय से पहले अपनी सारी ताकत समेट कर खड़े हो जाएँ और अपने आंसुओं को स्वयं अपने हाथों से सुखाएं।
स्वयं का मूल्यांकन करें। लम्बी साँस खींचकर अपने ध्यान को केंद्रित करते हुए याद रखें इस वक्त आप अकेले हैं कन्धा भी आपका है दर्द भी आपका इसलिए आपको अपनी ताकत स्वयं बनना है।
आप मरना चाहते हैं तो याद करें मौत तो कुदरत का नियम है यह कोई सब्जी रोटी तो नहीं कि हम नहीं बनाएंगे तो नहीं बनेगी मौत तो पहले से ही बनी बनायी है उसे कोई टाल नहीं सकता तो फिर हम क्यों कुदरत के नियम में टांग लगाएँ।
आपकी तन्हाई सिर्फ आप दूर कर सकते हैं। चिंतन और चिंतन लगातार चिंतन जो हो रहा क्यों हो रहा, उसका इलाज क्या है, अकेलेपन के वजह को ख़त्म करने के लिए पीछे जाना है या वजह को वहीँ छोड़कर आगे बढ़ना है| यह मौका है अपनी ताकत पहचानने का, अंधेरों से लड़ने का और अपनी आंतरिक शक्ति को पहचानने का।

जितनी देर तुम खुद को बर्बाद करने में, मैं तन्हा हूँ यह सोंचने में वक्त लगाओगे उतने समय के लिए आइना उठाकर खुद को उसमें देखो स्वयं से बातें करो, अपने कर्मों का मूल्यांकन करो, जीवन का उद्देश्य याद करो, टिक-टिक करती वक्त की घड़ी देखो जो तुम्हें तुम्हारी मौत की ओर स्वतः ही ले जा रही है।

फिर उठ खड़े हो जाओ अरे वक्त निकलता जा रहा है हमें जीना है मरने से पहले—
हमें कुछ सार्थक करना है मरने से पहले—-मत सोंचों क्या होगा कर्म हमारे हाथ में है, मेहनत हमारे हाथ में है— जो हमारे हाथ में है वो है मेहनत तो पूरी ऊर्जा उसी में लगा दें——स्वयं को खाली न बैठने दें जब खाली हों तब ईश्वर भक्ति का आनन्द लें योग करें| किसी संघर्षवान स्त्री या पुरुष की जीवनकथा सामने रखें उसके आदर्श और चरित्र को सामने रखें आप पाएंगे कि आप तन्हा नहीं हैं एक अदृश्य शक्ति आपका मार्गदर्शन कर रही है और आप में एक नयी ऊर्जा का संचार महशूस करेंगे—-माना कि यह सब मुश्किल है लेकिन असंभव नहीं—-

*जिंदगी कभी आसां नहीं ??होती मौत की तरह——*

*लेकिन इसका लिबास भी तो सफ़ेद कहाँ होता है साहिब—*✍🏻

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