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घुमक्कड़ अमीर

एक अमीर आदमी था। वह अक्सर देश-विदेश की यात्रा किया करता था। इसलिए वह अधिकतर घर से बाहर ही रहता था। जब कभी वह घर लौटकर आता, तो आसपास के युवकों को एकत्र करता और उन्हें अपनी यात्रा के चित्र-विचित्र अनुभवों के बारे में बताता।

अक्सर वह उन युवकों से पूछता!
क्या तुमने पेरिस का आयफेल टाॅवर देखा है?
क्या तुमने पिसा की झुकी हुई मीनार देखी है?
क्या तुमने आगरा का ताजमहल देखा है?

क्या तुमने दिल्ली की कुतुबमीनार देखी है?
वे लोग उसकी बातें सुनकर अवाक रह जाते!

हर बार उस घुमक्कड़ अमीर के सवालों के जवाब में युवकों के मुँह से यही निकलता, नहीं! यह सुनकर अमीर कहता, “तुम लोग घर छोड़कर बाहर कहीं गए ही नही। इसलिए तुम्हें जीवन का आनंद नहीं मिला।”

एक दिन युवकों ने उस अमीर आदमी से कहा, “क्या आप कभी शहर के कबाड़ी की दुकान पर गए हैं? चलिए,” घुमा लाते हैं आपको!

लड़के उसे लेकर कबाड़ी की दुकानपर पहुँचे। अमीर, कबाडी की दुकान देखकर दंग रह गया। उसने देखा कि कबाड़ी की दुकान उसके घर के कीमती समानों से भरी पड़ी है। उसने कहा, “अरे, मेरे घर की चीजें इस कबाडखाने में कैसे पहुँच गईं?

युवकों ने उसकी खिल्ली उड़ाते हुए कहा, “आप तो मुश्किल से अपने घर पर होते हैं। इसलिए आप अपने पुरखों की गाढ़ी कमाई की चीजें इसी तरह लुटाते जा रहे हैं।”

शिक्षा -समुचित देखभाल न करने पर घर की संपत्ति जाते देर नहीं लगती।

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