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अशोक गहलोत और सचिन पायलट फिर पहुंचे दिल्ली दरबार में।

क्या यह राहुल गांधी का रुतबा बढ़ाने की कवायद है?
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राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत और डिप्टी सीएम सचिन पायलट 26 दिसम्बर को एकबार फिर दिल्ली पहुंच गए है। रात को ही दोनों की मुलाकात कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी से हुई। माना जा रहा है कि मुलाकात के साथ ही मंत्रियों के विभागों का वितरण भी हो जाएगा। प्रदेश के 23 मंत्रियों ने 24 दिसम्बर को शपथ ली थी और तभी से मंत्री विभागों के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। जानकारों की माने तो गहलोत और पायलट का दिल्ली दरबार में बार बार पहुंचना, कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के राजनीतिक रुतबे को बढ़ाने की कवायद है। भाजपा ने सोशल मीडिया पर राहुल गांधी की जो छवि बनाई है उसे मिटाने के लिए यह दर्शाया जा रहा है कि कांग्रेस की सरकारें राहुल गांधी के विजन से चलती है। मुख्यमंत्री बनाना हो या मंत्री। राहुल गांधी का फार्मूला ही काम करता है। राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में किसानों के कर्ज माफ होने का श्रेय भी राहुल गांधी को दिया जा रहा है। राष्ट्रीय राजनीति में राहुल गांधी का रुतबा कैसे बढ़े इसके लिए तीनों कांग्रेस शासित राज्यों के सीएम जुटे हैं। भले ही मुख्यमंत्रियों को दिल्ली में इंतजार करना पड़े। राजस्थान से तो सीएम और डिप्टी सीएम दोनों दिल्ली पहुंचते हैं। 17 दिसम्बर से पहले तक तो गहलोत और पायलट को किराया देकर दिल्ली तक का हवाई सफर करना पड़ता था, लेकिन अब राज्य सरकार का विमान चैबीस घंटे सेवा में रहता है। सरकारी विमान से दोनों ने प्रदेश के किसी भी हिस्से में अभी तक यात्रा नहीं की। विमान का उपयोग अभी तक जयपुर और दिल्ली के बीच हुआ है।
मंत्रियों से पहले अफसरों की नियुक्तिः
23 मंत्रियों को जहां विभाग मिलने का इंतजार है वहीं अफसरों की नियुक्तियां हो गई है। सभी विभागों के सचिव और जिले के कलेक्टर बदल दिए गए हैं। सीएम और डिप्टी सीएम ने अपने अपने पसंदीदा अफसरों को तैनात कर दिया है।
एस.पी.मित्तल) (26-12-18)
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