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अजमेर में भाजपा के 5 विधायक होने के बाद भी पेयजल किल्लत पर आवाज नहीं। कांग्रेस तो अब सत्ता में है। मरण जनता का। जयपुर को अजमेर से ज्यादा सप्लाई क्यों ?

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करीब 5 लाख की आबादी वाले अजमेर शहर में तीन दिन में एक बार और जिले के उपखण्ड और ग्रामीण क्षेत्रों में 5 से 7 दिनों में एक बार मात्र 45 मिनट की पेयजल की सप्लाई से सर्दी के दिनों में लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। 11 दिसम्बर को विधानसभा चुनाव की मतगणना के बाद भाजपा विपक्षी पार्टी हो गई, लेकिन अजमेर जिले में 8 में से 5 विधायक भाजपा के होने के बाद भी पेयजल किल्लत पर आवाज बुलन्द नहीं हुई है। जहां तक कांग्रेस का सवाल है तो कांग्रेस अब सत्ता में है, इसलिए कांग्रेस के नेता चुप है। हालांकि कांग्रेस ने विधानसभा चुनाव में पेयजल की किल्लत को मुद्दा बनाया था, लेकिन सत्ता में आते ही कांग्रेस के लोग जनता की परेशानियों को भूल गए, यदि भाजपा के पांचों विधायक सामूहिक तौर पर जनात की आवाज उठाएं तो सरकार पर असर पड़ सकता है। जब सर्दी में तापमान मात्र 3-4 डिग्री है तब भी पानी की किल्लत है तो आने वाले दिनों में परेशानी का अंदाजा लगाया जा सकता ह। हालांकि केकड़ी के विधायक रघु शर्मा केबिनेट मंत्री बन गए है और अशोक गहलोत की सरकार में असर रखते हैं। चूंकि इस बार बीसलपुर बांध में बरसात के पानी की आवक कम हुई है। इसलिए जलदाय विभाग ने पानी की राशनिंग कर दी है। विभाग के इंजीनियरों के सामने बांध के पानी को आगामी जुलाई माह तक चलाने की चुनौती है। अजमेर जिले के लोगों की सबसे बड़ी समस्या बीसलपुर बांध से जयपुर को अधिक पानी दिए जाने की है। अजमेर में जब 3 से 7 दिनांें में एक बार पेयजल की सप्लाई हो रही है तब बीसलपुर बांध से पानी लेकर जयपुर में रोजाना पेयजल की सप्लाई की जा रही है। सवाल उठता है कि जब पानी का स्त्रोत एक है तो फिर अजमेर के साथ भेदभाव क्यों किया जा रहा है ? क्या जयपुर में पानी की कटौती कर अजमेर को दो दिन में एक बार पेयजल की सप्लाई नहीं हो सकती ? माना कि जयपुर प्रदेश की राजधानी है, लेकिन आखिर अजमेर में भी इंसान रहते हैं। सरकार इंसान-इंसान में भेदभाव कर रही है। रघु शर्मा फिलहाल अजमेर के सांसद भी बने हुए है। लोकसभा के उपचुनाव में जीत के बाद ही रघु शर्मा का राजनीतिक कद बढ़ा। रघु राजनीति में सफलता के जिस मुकाम पर आज खड़े है, उसमें अजमेर के मतदाताओं का ही योगदान है। यदि उपचुनाव में रघु शर्मा हार जाते तो क्या आज केबिनेट में मंत्री होते? रघु को अजमेर जिले के मतदाताओं का अहसानमंद होना चाहिए। मई में होने वाले लोकसभा चुनाव में रघु शर्मा के नेतृत्व कुशलता की परीक्षा होनी है। गर्मी शुरू होने पर मई में पेयजल की और किल्लत होगी। यदि अभी रघु शर्मा अजमेर की जनता के साथ खड़े नहीं हुए तो लोकसभा चुनाव में खामियाजा भी उठाना पड़ सकता है। प्रदेश में भले ही कांग्रेस की सरकार बन गई हो, लेकिन विधानसभा चुनाव में अजमेर जिले में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद खराब रहा है। आठ में से दो सीटों पर ही कांग्रेस की जीत हुई है। रघु शर्मा को चाहिए कि जयपुर को दी जाने वाली सप्लाई में तत्काल प्रभाव से कटौती करवाए। वर्तमान में बीसलपुर बांध से जयपुर को 500 एमएलडी तथा अजमेर को मुश्किल से 250 एमएलडी पानी प्रतिदिन सप्लाई हो रहा है।
एस.पी.मित्तल) (30-12-18)

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